हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला।
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने भले ही 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को प्रमोट करने के लिए अंक निर्धारण के लिए तय आठ मापदंड तय किए थे, लेकिन 5221 इन मापदंडों पर खरा नहीं उतर पाए। इन्हें फेल घोषित किया गया है। फेल होने वाले परीक्षार्थियों में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। निजी स्कूलों के नाममात्र परीक्षार्थी ही असफल हुए हैं। 5221 में से निजी स्कूलों के महज 31 बच्चे फेल हुए हैं, जबकि सरकारी स्कूलों के 5190 विद्यार्थी शिक्षा बोर्ड की ओर से तय मापदंडों पर खरा नहीं उतरे हैं।
स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित परिणाम में 5.17 परीक्षार्थी फेल रहे हैं। ये विद्यार्थी परीक्षाएं न होने के बावजूद 12वीं कक्षा की परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा बोर्ड ने जिन परीक्षार्थियों को कंपार्टमेंट घोषित किया है, उनमें सरकारी स्कूलों से 691, जबकि निजी स्कूलों से 20 अभ्यर्थियों को कंपार्टमेंट घोषित किया गया है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों के 26 और प्राइवेट स्कूलों से 48 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे हैं।
खुद के आंकड़ों में उलझा शिक्षा बोर्ड
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जमा दो कक्षा का परीक्षा परिणाम तो घोषित कर दिया, लेकिन वह अपने ही आंकड़ों में उलझा रहा। बोर्ड की ओर से उपलब्ध करवाए आंकड़ों में एक जगह जहां 5220 परीक्षार्थियों को फेल बताया, वहीं एक अन्य आंकड़े में यह संख्या 5221 पहुंच गई। इसके अलावा स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कंपार्टमेंट छात्रों की संख्या 702 परीक्षार्थियों की संख्या दर्शाई, लेकिन बोर्ड की ओर से बताई गई तीन सालों की समरी में यह आंकड़ा कहीं भी मेल नहीं खा रहा है। इस संदर्भ में बोर्ड के कर्मचारियों का कहना था कि जो आंकड़े आपको उपलब्ध करवाए गए हैं, आप उन्हें ही प्रकाशित करो।
31 विद्यार्थियों के 99 फीसदी अंक
परीक्षा परिणाम में 31 विद्यार्थियों ने 99 फीसदी अंक हासिल किए हैं। 3.64 फीसदी के 90 से 100 प्रतिशत के बीच अंक हैं। 90 से 100 प्रतिशत अंक पाने वालों में सरकारी स्कूलों से 166 छात्र, जबकि 459 छात्राएं शामिल हैं। वहीं निजी स्कूलों से 1123 छात्र और 1931 छात्राएं हैं। वर्ष 2020 में 90 से 100 प्रतिशत अंक हासिल करने वालों की संख्या 2.64 फीसदी थी, जिनमें सरकारी स्कूलों से 1213, जबकि निजी स्कूलों से 1075 परीक्षार्थी शामिल थे।