वर्तमान में हैदराबाद की कंपनी से बनाए गए करीब 90 लाख के सॉफ्टवेयर के माध्यम से छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया जाता है। इस पोर्टल की खामियां भी छात्रवृत्ति घोटाले की जानकारी नहीं मिलने का एक बड़ा कारण रही है। कई विद्यार्थियों के आवेदनों में एक ही मोबाइल फोन नंबर, एक ही बैंक खाता नंबर जैसी गलतियों को यह पोर्टल पकड़ नहीं सका।
इसके अलावा पोर्टल में शिक्षा विभाग के कुछ कर्मियों ने निजी शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर डाटा से छेड़छाड़ भी की, जिससे घोटाले को अंजाम दिया गया। इन गलतियों को दूर करने के लिए निदेशालय ने अब पोर्टल की कड़ी निगरानी करने का फैसला लिया है।