हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत में पेश न होने पर प्रधान सचिव लोक निर्माण विभाग के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने भरत खेड़ा को आज अदालत के समक्ष तलब किया है। अवमानना के मामले में आदेशों के बावजूद अदालत के समक्ष पेश न होने पर अदालत ने कहा कि भरत खेड़ा कोई अज्ञानी या देहाती ग्रामीण नहीं है। अदालत ने पाया कि आदेशों के मुताबिक भरत खेड़ा को छोड़कर सभी अधिकारी अदालत के समक्ष मौजूद हैं। इस मामले में केके कौशल अधीक्षण अभियंता मंडी, जेके गुप्ता अधिशाषी अभियंता मंडी और अर्चना ठाकुर मुख्य अभियंता को प्रतिवादी बनाया गया है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यह अधिकारी 16 सितंबर से किन्नौर दौरे पर हैं। अदालत ने हैरानी जताते हुए कहा कि उसे अदालत के समक्ष पेश होने के बारे में गत 26 अगस्त को आदेश दिए गए थे। वह एक जिम्मेदार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और अदालत के आदेशों की अनुपालना में क्या करना है क्या नहीं, उसे सब पता है। इसके बावजूद वह अपने कार्य को इस तरह से व्यवस्थित करने में नाकाम रहा, ताकि अदालत में पेश हो सके। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि भरत खेड़ा की ओर से अदालत में पेश होने से छूट के लिए आवेदन प्राप्त हुआ है। यह अभी तक अदालत के समक्ष दायर नहीं किया गया है।