छात्रवृत्ति में घोटाला करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों की शामत आने वाली है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सरकारी धनराशि का दुरुपयोग होने की शिकायतें मिलने पर कड़ा संज्ञान लिया है। उच्च शिक्षा निदेशक ने उच्च शिक्षण संस्थानों को आदेश जारी कर फर्जी तरीके से ली गई छात्रवृत्ति राशि को 15 दिन में लौटाने की मोहलत दी है।
चेतावनी पत्र में कहा गया है कि आडिट में ब्लैक लिस्ट होने वाले शिक्षण संस्थानों की स्कालरशिप ग्रांट को बंद कर दिया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय के मुताबिक कई शिक्षण संस्थान छात्रवृत्ति राशि प्राप्त करने के लिए डुप्लीकेट आवेदनों को स्वीकृत कर रहे हैं। इस कारण वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कई संस्थान अपनी मर्जी से छात्रों के बैंक खाते खोल रहे हैं। ऐसा करने पर ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।
बैंक खातों की पास बुक, चेक बुक और एटीएम कार्ड भी संस्थान अपने पास रख रहे हैं। कई संस्थान छात्रों को शिक्षा विभाग द्वारा दिए जा रहे मेंटेनेंस अलाउंस की अदायगी भी नहीं कर रहे हैं। कई संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी को निशुल्क शिक्षा देने की बात कहकर प्रवेश दिया जा रहा है। कुछ महीनों बाद ऐसे छात्रों से फीस मांगी जा रही है।
शिक्षण संस्थानों के अलावा कई विद्यार्थी भी कर रहे हैं फर्जीवाड़ा
ऐसा न करने पर परीक्षा में न बैठने देने की धमकियां दी जा रही हैं। शिक्षा निदेशालय के मुताबिक शिक्षण संस्थानों के अलावा कई विद्यार्थी भी छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। एक संस्थान से छात्रवृत्ति प्राप्त करने के बाद ऐसे विद्यार्थी कहीं और प्रवेश प्राप्त कर वहां भी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी का कहना है कि 15 दिनों के भीतर अगर संस्थानों ने इस तरह के मामलों को पकड़कर स्वयं ही फर्जी तरीके से प्राप्त की गई राशि को नहीं लौटाया तो आडिट के दौरान सामने आने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय ने निदेशक स्वास्थ्य निदेशक, निदेशक तकनीकी शिक्षा, निदेशक दंत स्वास्थ्य सेवा, सचिव निजी शिक्षण संस्थान
नियामक आयोग, रजिस्ट्रार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, रजिस्ट्रार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, रजिस्ट्रार बागवानी विश्वविद्यालय नौणी, रजिस्ट्रार तकनीकी विश्वविद्यालय, प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों, निजी उच्च शिक्षण संस्थानों और सभी जिला उपनिदेशकों को पत्र जारी किया है। सभी से अपने-अपने अधीन चल रहे संस्थानों को आदेशों से अवगत करवाने के आदेश दिए हैं।