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कंडक्टर भर्ती में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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एचआरटीसी की ट्रांसपोर्ट मल्टीपर्पज एसिस्टेंट (कंडक्टर) भर्ती में अजब खेल हुआ है। इस भर्ती परीक्षा का पेपर बेशक तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने लिया, लेकिन इसके लिए पेपर सेटर एचआरटीसी ने ही दिए। यानी बोर्ड एक शेडो एजेंसी भर था। अब बड़ा सवाल ये है कि पेपर सेट करने वाले आखिर किसकी मर्जी के थे और इसका फायदा किसे मिला?
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680 पदों के लिए करीब 35 हजार आवेदकों ने 19 अक्तूबर को लिखित परीक्षा दी। आजकल एचआरटीसी डिविजन वार इनके इंटरव्यू ले रहा है। इसी भर्ती परीक्षा पर 4 दिसंबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हंगामा हुआ था। अमर उजाला ने जब इस मसले की पड़ताल की तो गंभीर खामियां सामने आई हैं।

ये तो सरासर नियमों की अवहेलना

अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड के विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी एजेंसी को अधिकृत करने के बाद संबंधित महकमे का कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता। ऐसे में पैनल एचआरटीसी ने क्यों दिया? खासकर तब जबकि एचआरटीसी और बोर्ड दोनों एक ही मंत्री देख रहे हैं। दूसरा तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने रिजल्ट बनाते समय मेरिट में आए आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को पहले ही जनरल कैटेगिरी में डाल दिया।

एक टॉपर तीन जगह दिखाया, जिससे करीब 900 अभ्यर्थी डि-बार हो गए। तीसरी खामी बेहद गंभीर है। एचआरटीसी ने इस भर्ती के लिए एक स्टैंडिंग कमेटी बनाई थी। इसने तय किया था कि रिटन टेस्ट बोर्ड लेगा और बोर्ड से रिटन के नंबर जाने बिना इंटरव्यू एचआरटीसी में होंगे। लेकिन बोर्ड ने रिटन टेस्ट के नंबर भी एचआरटीसी को भेज दिए।
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किसकी मर्जी के थे पेपर सेटर?

सितंबर 2014 में स्टैंडिंग कमेटी ने तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव को गोपनीय पत्र लिखा कि चूंकि भर्ती परीक्षा के सिलेबस में बदलाव हुआ है, इसलिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ पेपर सेट करने के लिए जाने चाहिए।

इसी पत्र में एचआरटीसी के रिटायर्ड सीजीएम एससी पॉल, रिटायर्ड सीजीएम राजीव गुप्ता, आरटीओ बिलासपुर एमएल धीमान, सचिव एसटीए संजय शर्मा, डीएम धर्मशाला विजय सिंह और एसपी विजिलेंस धर्मशाला विमल गुप्ता के नाम दिए गए।

विरोधाभासी बयान
1. भर्ती के लिए स्टैंडिंग कमेटी बनाई। तकनीकी शिक्षा बोर्ड को कम लागत के आधार पर चुना। बोर्ड की मांग पर ही पैनल दिया। बोर्ड पैनल से बाहर भी पेपर सेट करवा सकता था।
- डा. आरएन बत्ता, एमडी एचआरटीसी
2. टीएमपीए भर्ती के लिए नियमों को फॉलो किया गया है। एचआरटीसी ने सिलेबस एवं फॉरमेट में बदलाव के अनुसार खुद ही पैनल दिया था। बोर्ड ने इसे नहीं मांगा था।
- सुनील वर्मा, सचिव तकनीकी शिक्षा बोर्ड
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