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कौडि़यों के भाव जमीन खरीद कर करोड़ों का ले लिया मुआवजा

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सिरमौर जिले में बन रही रेणुका बांध परियोजना क्षेत्र में जमीनों की खरीद फरोख्त के नाम पर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। कई रसूखदार लोगों ने किसानों से कौडि़यों के भाव जमीन खरीद कर सरकार से करोड़ों का मुआवजा ले लिया है। कुछ समय पूर्व ऐसे चंद मामले सामने आने के बाद अब सरकार के पास ऐसी कई शिकायतें पहुंची हैं। विधानसभा में भी यह मामला जोरशोर से उठा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सदन में स्पष्ट किया कि ऐसी कई शिकायतें सरकार के पास आ चुकी हैं।
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अब हर शिकायत की सरकार गंभीरता से जांच करेगी। उन्होंने सदन में कहा कि ऐसे कुछ मामलों की पहले से भी विजिलेंस जांच कर रही है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक आशा कुमारी के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने रेणुका बांध क्षेत्र में किसानों की जमीनें सस्ती दरों पर खरीदीं और इनका करोड़ों रुपये मुआवजा लिया है, उनके खिलाफ छानबीन के बाद कड़ी कार्रवाई होगी।
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2,917 किसानों की जमीन ली गई

गौरतलब है कि यमुना नदी पर बन रहे राष्ट्रीय महत्त्व के रेणुका बांध प्रोजेक्ट के लिए कुल 4,491 बीघा भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इसमें 2,917 किसानों की जमीन ली गई है। आरोप है कि इनमें से कई किसानों से कुछ लोगों ने अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सस्ते रेट पर जमीन खरीद ली। बाद में अधिग्रहण होने पर करोड़ों रुपये का मुआवजा सरकार ने लिया।

पावर ऑफ अटार्नी के नाम पर भी ग्रामीणों की जमीन के करोड़ों रुपये हड़पने के आरोप हैं। विधायक आशा कुमारी ने कहा कि इस क्षेत्र में ग्रामीणों से कुछ हजार रुपये में जमीनें खरीदीं और बाद में इन्हें करोड़ों में बेच दिया गया। राजधानी दिल्ली को पानी देने वाले और 40 मेगावाट बिजली के इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट को हिमाचल प्रदेश पॉवर कारपोरेशन बना रहा है।
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