वयोवृद्ध बागवान नेता हरीचंद रोच
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सेब पैकिंग के लिए अधिकतम 24 किलो की शर्त मानने से संयुक्त किसान मंच ने इनकार कर दिया है। मंच का दावा है कि 24 किलो पैकिंग करने पर निर्धारित से एक ग्रेड ऊपर पैकिंग होगी, जिससे बागवानों को नुकसान जबकि खरीदार को 4 किलो का सीधा फायदा होगा। मंच की मांग है कि पैकिंग के लिए 20 किलो का अंतरराष्ट्रीय मानक लागू होना चाहिए। प्रदेश में सेब खरीदने वाली अदाणी सहित अन्य निजी कंपनियां भी 20 किलो के पैक में सेब बेच रही हैं जो 2,200 से 2,800 रुपये तक बिक रहा है। जब निजी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सेब बेच कर मुनाफा कमा सकती हैं तो बागवानों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है।
कोटगढ़ हॉर्टिकल्चरल एंड एनवायरनमेंट सोसायटी के अध्यक्ष वयोवृद्ध बागवान नेता हरीचंद रोच का कहना है कि वजन के हिसाब से सेब बिक्री के लिए यूनिवर्सल कार्टन ही एकमात्र विकल्प है। इस कार्टन के इस्तेमाल से हर बॉक्स को अलग से तौलने की जरूरत नहीं रहेगी। मंडियों में बागवानों को 24 किलो से भी अधिक सेब एक बॉक्स में लाने का दबाव बनाया जाता है, इसलिए टेलिस्कोपिक कार्टन पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए। अगर सरकार भी 24 किलो तक सेब लाने का नियम लागू करे तो बागवानों का शोषण होगा, इसलिए 20 किलो के यूनिवर्सल कार्टन में सेब पैकिंग को लागू किया जाना चाहिए।
सेब के न्यूनतम दाम घोषित करे सरकार : कुलदीप
संयुक्त किसान मंच के सदस्य कुलदीप शर्मा का कहना है कि मंडियों में आढ़तियों और खरीदारों की मनमानी रोकने के लिए सेब खरीद के न्यूनतम दाम घोषित किए जाने चाहिए। सेब उत्पादन की लागत के आधार पर ए, बी और सी ग्रेड सेब क्रमश: 80, 60 और 30 रुपये प्रति किलो बिकना चाहिए।
उत्तराखंड ने बजट में बागवानी के लिए रखे 813 करोड़ : लोकेंद्र
प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार से बागवानी विकास के लिए उदारता से बजट प्रावधान की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह विष्ट का कहना है कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने अपने वार्षिक बजट में बागवानी के लिए 813 करोड़ का प्रावधान रखा है। बजट सेब और अंगूर की बागवानी पर इस्तेमाल होगा। हिमाचल में सेब की 6,000 करोड़ की आर्थिकी है, लेकिन मंडी मध्यस्थता योजना के तहत बागवानों के 80 से 90 करोड़ के भुगतान में ही 3 से 4 साल लग रहे हैं।