राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा है कि प्रदेश के स्कूलों में जमा दो कक्षा तक संस्कृत पढ़ना अनिवार्य किया जाना चाहिए। संस्कृत से ही संस्कार आएंगे। संस्कृत को बढ़ावा देने से युवा पीढ़ी हमारी समृद्ध पारंपरिक विरासत के बारे में जागरूक हो सकेगी। जमा दो तक संस्कृत विषय पढ़ाने से सही अर्थों में देवभूमि हिमाचल में देव संस्कृति स्थापित होगी।
राज्यपाल ने दसवीं कक्षा तक संस्कृत को अनिवार्य तौर पर पढ़ाने के लिए राज्य सरकार का आभार भी जताया। शनिवार को शिक्षक दिवस पर राजभवन में राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार देने के बाद राज्यपाल ने कहा अध्यापक की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका होती है। वे विद्यार्थियों सहित समग्र समाज के आदर्श होते हैं।
देश और समाज के विकास का पैमाना मानव विकास होता है न कि अधोसंरचना विकास। शिक्षण की समृद्ध परंपराओं और उच्च सोच की बदौलत ही हमारे देश को विश्व गुरु के रूप में जाना जाता है, जिसका श्रेय शिक्षकों को जाता है। इन परंपराओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
शिक्षा तभी सार्थक मानी जा सकती है, जब विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूर्ण कर समाज के लिए संपदा बनें और देश के विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने प्रदेश सरकार को रोजगारोन्मुखी शिक्षा केंद्र खोलने की सलाह दी। राज्यपाल ने शिक्षकों को प्रेरणास्रोत, अनुशासित बनने के टिप्स भी दिए। शिक्षकों को समाज और देश निर्माण में उनकी अहम भूमिका से भी अवगत करवाया।