मंडी जिले में सायर का पर्व हर्षोल्लास और आस्था भाव के साथ मनाया गया। मंडी, सराज, बल्ह, सुंदरनगर, धर्मपुर, करसोग में सायर का पूजन किया गया। अखरोट, सेब, अमरूद, मक्की, धान और सीजन की हर फसल को धान रूपी सायर के साथ रखा गया और पूजा की गई।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सायर का पर्व हर्षोल्लास और आस्था भाव के साथ मनाया गया। मंडी, सराज, बल्ह, सुंदरनगर, धर्मपुर, करसोग में सायर का पूजन किया गया। अखरोट, सेब, अमरूद, मक्की, धान और सीजन की हर फसल को धान रूपी सायर के साथ रखा गया और पूजा की गई। पूजन के दौरान फसल में इजाफे की कामना की गई। गोहर के जालपा माता मंदिर में अखरोट की बरसात करके किसानों की फसल की वृद्धि की कामना की गई। जालपा माता मंदिर के गूर मुरारी लाल ने देवी जालपा के दर्शनों के लिए मंदिर पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं पर अखरोट की बरसात की। एक माह बाद सायर उत्सव की पावन बेला पर कमरुघाटी के बंद पड़े मंदिरों के कपाट शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ खोले गए। कमरुघाटी में सायर उत्सव धूमधाम से मनाया गया। घाटी के धार्मिक स्थल जालपा माता मंदिर सरोआ में श्रद्धालु अखरोट, स्थानीय खीरा और मक्की लेकर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने माता जालपा को अखरोट के साथ द्रुभा (पवित्र घास) चढ़ाए। यह जालपा मंदिर में सायर उत्सव पर मुख्य आकर्षण रहा।
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शनिवार को घाटी के अन्य मंदिरों के कपाट खुले जहां लोगों ने अपने इष्ट देवताओं की पूजा की और मक्की, खीरा और अखरोट चढ़ाए। देवताओं के कपाट खुलते ही गूरों ने देवी-देवताओं की पिंडियों और मूर्तियों पर देसी घी की बरसात की। देसी घी में चावल मिलाकर देवी-देवताओं का शृंगार कर उनको कल्या (पूजा ) लगाई गई। बड़ा देव कमरुनाग, देव बाला कामेश्वर, शिल्हि लटोगली, माता मधोगन्न शिव शक्ति गौरा, संतोषी माता, लंबोदरी माता समेत घाटी के अन्य मंदिरों के कपाट खुलने से माहौल भक्तिमय हो गया। शनिवार सुबह घाटी के लोगों ने घर में पेठू (कद्दू ) की पूजा की और तरह तरह के पकवान तैयार कर पेठू को चढ़ाए। इधर, लडभड़ोल क्षेत्र में शनिवार को अखरोटों का त्योहार (सायर उत्सव) बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। लोगों ने खाद्य व्यंजनों को भी प्रसाद के रूप में वितरित किया। उधर, जोगिंद्रनगर में किसानों ने फसलों की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के साथ सायर पर्व मनाया।