तिब्बती संघर्ष के कार्यकर्ता और लेखक तेंजिन सुंडू
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तिब्बत की आजादी के लिए हमें भी महात्मा गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई की जरूरत है। यह बात तिब्बती संघर्ष के कार्यकर्ता और लेखक तेंजिन सुंडू ने जिला कांगड़ा की ओर से आयोजित दो दिवसीय साहित्य मेले में कही। कहा कि भारत और खासकर धर्मशाला ने तिब्बतियों को दुनिया दिखाई है। अब यहीं से तिब्बतियों को वतन वापसी की उम्मीद है। डिग्री कॉलेज धर्मशाला के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय साहित्य मेला शुरू हुआ।
अपनी किताब ‘इन दि फुटस्टेप्स ऑफ रामा’ के जरिये साहित्यिक जगत में विशेष पहचान बनाने वाले नीलेश कुलकर्णी ने कहा कि आस्था और विश्वास को प्रमाणिकता की आवश्यकता नहीं होती। किताब लिखने के लिए वह भगवान राम के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थानों पर भारत और श्रीलंका में घूमे। उन्होंने पाया कि हर स्थान पर श्रीराम की अलग-अलग छवियां बनी हैं। इन्हीं रूपों में वे पूजनीय हो गए हैं। कथाएं भले बदलते रहें, लेकिन श्रीराम के जीवन का सारांश भाव हमेशा अक्षुण्ण बना रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त और कई साहित्य सम्मानों से सम्मानित कवयित्री लिली स्वर्ण ने ‘इसा ग्रायें देया लंबरा हो, इना छोरूआं जो लेयां समझाई कि बत्ता जांदे सिटी मारदे’ और ‘नूरपुरे दिए खतरटिए’ गुनगनाकर पहले दिन की महफिल लूट ली। कहा कि कविता को अभिव्यक्त करने के लिए आकर्षक भाषा और विशेषणों की जरूरत नहीं होती। ऐसी अभिव्यक्ति की जरूरत है, जो मर्म को छू जाए।
पहले दिन नीलेश कुलकर्णी, तेंजिन सुंडू, डॉली गुलेरिया, सुनयना शर्मा, लिली स्वर्ण, विवेक अत्रेय, योगेश कोच्चर, सौम्या, विजय शर्मा, डॉ. हिरदा पॉल, अभ्युदिता गौतम ने विचार रखे। जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल, विधायक विशाल नैहरिया, एडीसी राहुल कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।