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नर्सिंग कॉलेज का फर्जीवाड़ा, बिना मान्यता कर डाले दाखिले

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हिमाचल के ऊना के लोअर बसाल में चल रहे नर्सिंग कॉलेज में फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीएससी नर्सिंग के बैच बैठाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिना मान्यता बैच बिठाने वाले संस्थान का चेयरमैन पूर्व डीजीपी डीएस मिन्हास का बेटा अमिल मिन्हास हैं।
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मामला उजागर होने के बाद सोमवार को एचपीयू के कुल सचिव ने एसपी शिमला को लिखित में शिकायत सौंपी है। इसमें संस्थान की मान्यता से जुड़े कई अहम दस्तावेज भी सौंपने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार संस्थान को अक्तूबर 2012 में शुरू होने वाले सत्र के लिए तो इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने मान्यता दी, लेकिन इसके बाद 2013-14 और 2014-15 के लिए अनुमति नहीं दी गई।

हाल ही में 2015-16 के बैच पर भी संशय है। विश्वविद्यालय के कुल सचिव डा. पंकज ललित ने 9 अक्तूबर 2015 को ट्रस्ट के चेयरमैन और कॉलेज प्रिंसिपल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 17 अक्तूबर तक जवाब मांगा था।
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संस्‍थान ऐसे आया संदेह के दायरे में

एचपीयू की ओर से जारी नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। विविप्रबंधन का आरोप है कि इस संस्‍थान ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल के फर्जी अनुमति पत्र दिखाकर विवि और काउंसिल कमेटी को गुमराह किया और बैच बिठा दिया। संस्‍थान को पहली बार 40 सीटों की अनुमति मिली थी।

संस्‍थान की मान्यता नया बैच बैठाने की इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मांगी गई जानकारी एचपीयू को 28 सितंबर को मिली। जवाब में काउंसिल ने स्पष्ट किया कि इस संस्‍थान को 2012 में नया बैच बैठाने को कोई अनुमति पत्र जारी नहीं किया गया है। 2013-14-15 में कोई रिन्युअल नहीं हुई है।

ये है प्रिंसिपल की सफाई
संस्‍थान के प्रिंसिपल अनिल मन्हास का कहना है कि सभी तरह की परमिशन लेने के बाद ही नर्सिंग कॉलेज की शुरुआत की गई। इंडियन नर्सिंग काउंसिल से कुछ विवाद चल रहा है वह कोर्ट में विचाराधीन है। अब तीसरा बैच चल रहा है। विवि को क्या अब तीन साल बाद कोई फर्जीवाड़ा नजर आया। यह सब राजनीतिक द्वेष के तहत किया जा रहा है। हम जांच का सामना करने को तैयार है।
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क्या कहना है एचपीयू का

प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. पंकज ललित ने बताया कि इस संस्थान की मान्यता को लेकर नर्सिंग काउंसिल से 2014-15 और 2015-16 मांगी गई जानकारी के जवाब में संस्थान को नया बैच बिठाने को मान्यता नहीं दी गई है। जबकि संस्थान ने नर्सिंग काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुमति का पत्र जमा करवाया था, जो फर्जी पाया गया।

ऐसा कोई लेटर काउंसिल से जारी ही नहीं किया है। इसी आधार पर ही पुलिस में शिकायत दी गई है। 2015-16 के लिए किए निरीक्षण में भी इस संस्थान को उपयुक्त नहीं पाया गया है। हालांकि कोर्ट के आदेश पर संस्थान को काउंसलिंग में हिस्सा लेने की सशर्त अनुमति दी।
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