आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि बच्चे को इंजेक्शन लगाने के बाद उल्टी आ गई और शरीर नीला पड़ गया। परिजनों को बच्चे का पोस्टमार्टम करवाने की सलाह दी गई है, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के शिशु रोग वार्ड में दाखिल सात माह के बच्चे की इंजेक्शन लगाने के कुछ देर बाद खून की उल्टी होने और शरीर नीला पड़ने से मौत हो गई। सोमवार को हुई इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। परिजनों का आरोप है गलत इंजेक्शन लगाने से बच्चे की जान गई है। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल प्रबंधन उक्त कर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
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बच्चे के पिता त्रिलोक रावत के मामा इंद्रजीत ने कहा कि बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था। आरोप लगाया कि वार्ड में सुबह ही एक और बच्चा दाखिल हुआ था। यह इंजेक्शन उसे लगना था, लेकिन इसे उनके बच्चे को लगा दिया गया। इससे उसकी मौत हो गई। जिला शिमला की जांघला उपतहसील के गांव गुमना निवासी त्रिलोक रावत ने अपने सात माह के बच्चे को 17 सितंबर को अस्पताल में भर्ती करवाया था।
बच्चे को खांसी, बुखार के अलावा ठंड से छाती जाम होने की शिकायत थी। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह डॉक्टर करीब सवा आठ बजे डॉक्टर वार्ड में आए और बच्चे को इंजेक्शन लगाने के लिए कहा। नर्स के टीका लगाने के कुछ देर बाद ही खून की उल्टी होने से बच्चे की मौत हो गई।
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इसके बाद बच्चे को तुरंत आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। घटना का पता लगते ही अस्पताल प्रबंधन के प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और बच्चे की फाइल संबंधी अन्य दस्तावेज सील किए। उधर, देर शाम थाना सदर और लक्कड़ बाजार पुलिस चौकी से आई पुलिस टीम ने बच्चे के शव का मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम करवाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सामने आएगा सच
आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चे को निमोनिया था। वह पहले रोहड़ू अस्पताल में भर्ती था। तीन दिन पहले उसे आईजीएमसी लाया गया था। बच्चे को इंजेक्शन लगाने के बाद उल्टी आ गई और शरीर नीला पड़ गया। परिजनों को बच्चे का पोस्टमार्टम करवाने की सलाह दी गई है, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों का पता चलेगा।