कुल्लू के मशहूर बिजली महादेव मंदिर और शिमला जिला के सराहन से सटे बशाल-कांडा तक रोप-वे पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है। धार्मिक पर्यटन और अनदेखे प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने दोनों स्थानों पर रोप-वे बनाने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। रोप-वे निर्माण का जिम्मा पर्यटन विभाग ने प्रदेश इन्फरास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड को दिया है।
इच्छुक कंपनियों के साथ 11 जुलाई को प्री बिड बैठक बुलाई है। कुल्लू जिला में कुल्लू बाईपास से बिजली महादेव मंदिर तक करीब 1.95 किलोमीटर का रोप-वे बनाना प्रस्तावित है। कुल्लू का इतिहास बिजली महादेव से जुड़ा हुआ है। कुल्लू शहर में ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास एक ऊंचे पर्वत के ऊपर बिजली महादेव का प्राचीन मंदिर है।
कुल्लू घाटी में मान्यता है कि यह घाटी एक विशालकाय सांप का रूप है। इस सांप का वध भगवान शिव ने किया था। जिस स्थान पर मंदिर है, वहां शिवलिंग पर हर 12 साल में भयंकर आकाशीय बिजली गिरती है। बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। यहां के पुजारी खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित कर मक्खन के साथ इसे जोड़ देते हैं।
कुछ ही माह बाद शिवलिंग एक ठोस रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। हजारों की संख्या में लोग हर साल यहां दर्शन करने के लिए जाते हैं। रोप-वे के बनने से लोगों को ऐतिहासिक मंदिर तक पहुंचना आसान हो जाएगा। उधर, शिमला जिले के सराहन में बशाल-कांडा तक 3.150 किलोमीटर का रोप-वे प्रस्तावित है।
बशाल-कांडा तक ट्रैक से जाने का रास्ता है। इसके एक ओर शिमला की पहाड़ियां तो दूसरी ओर किन्नौर की पहाड़ियां हैं। प्रदेश का यह एक अनदेखा क्षेत्र है। इस क्षेत्र तक पहुंचने की राह आसान होने से सैलानियों को नई जगह देखने को मिलेगी।