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रोहतांग में और वाहनों पर विचार को सुप्रीम कोर्ट तैयार

Thu, 19 May 2016 09:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनजीटी ने रोहतांग दर्रे पर रोजाना 1,200 वाहनों के आवाजाही की अनुमति दी थी। - फोटो : अमर उजाला
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रोहतांग दर्रे पर और अधिक संख्या में वाहनों को आवाजाही की इजाजत देने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के तैयार हो गया है। मालूम हो कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए गत नौ मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोहतांग दर्रे पर रोजाना 1,200 वाहनों के आवाजाही की अनुमति दी थी।
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न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन से कहा कि वह याचिका दाखिल कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले को चुनौती दे, तब इस पर विचार किया जाएगा। पीठ ने इस मामले में सरकार और यूनियन समेत अन्य पक्षों को इस पर सलाह देने के लिए कहा है। अदालत सोमवार को याचिका पर विचार करेगी।

गत नौ मई को एनजीटी ने रोहतांग दर्रे पर रोजाना 800 पेट्रोल और 400 डीजल वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी थी। साथ ही एनजीटी ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल वाहनों को सीएनजी में परिवर्तित करने का आदेश दिया था। बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश रंजीत कुमार ने कहा कि राज्य में सीएनजी की आपूर्ति के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (गेल) के साथ बातचीत जारी है।
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लेकिन राज्य सरकार को इसके लिए उचित बिजनेस मॉडल लाना होगा। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि सीएनजी स्टेशनों के लिए जगह की पहचान भी कर ली गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल ने पीठ के समक्ष कहा कि इस सीजन में करीब 35 लाख पर्यटकों के रोहतांग दर्रा आने की उम्मीद है। ऐसे में महज 1,200 वाहनों की इजाजत देना समस्या का समाधान नहीं है।

उन्होंने बताया कि गत वर्ष इलाके में टैक्सी ड्राइवर और ऑपरेटर्स ने रोहतांग दर्रे पर सीमित संख्या में वाहनों की आवाजाही का विरोध किया था। इसे लेकर हिंसा भी हुई थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नहीं चाहती है कि इस वर्ष भी इस तरह की घटनाएं हो।

वहीं याचिकाकर्ता संगठन हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने कहा कि पूरे राज्य में सीएनजी नहीं है। उन्होंने कहा कि वाहनों की पाबंदी के पीछे कोई तार्किक कारण नहीं दिखता। केवल रोहतांग दर्रे पर ही पाबंदी क्यों? उन्होंने बताया कि रोहतांग दर्रे पर प्रदूषण तय सीमा से कम है।

यहां प्रदूषण देश के दूसरे जगहों से कम है। उन्होंने कहा कि पनबिजली परियोजनाओं को क्यों नहीं रोका जा रहा है, वे ज्यादा प्रदूषण फैला रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी वाहनों से जितना प्रदूषण होता है उससे कहीं अधिक तो एक हाइड्रो पावर स्टेशन से होता है।

हालांकि पीठ ने कहा कि ऐसा हिमालय के पर्यावरण की रक्षा के लिए किया जा रहा है। पीठ ने सभी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। साथ ही केंद, राज्य सरकार सहित सभी स्टेकहोल्डर को बातचीत कर उचित समाधान निकालने के लिए कहा गया है।
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