प्रदेश सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में मरीजों को तुरंत ऑक्सीजन उपलब्ध होगी। अस्पताल का अपना ऑक्सीजन प्लांट दिसंबर से काम करना शुरू कर देगा। रोगी कल्याण समिति की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने प्लांट को जल्द से जल्द तैयार करने को कहा। प्लांट तैयार हो जाने के बाद अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडरों की कोई कमी नहीं रहेगी।
मेडिकल कॉलेज में प्लांट को पीपीपी मोड पर बनाया जा रहा है। इस प्लांट में एक घंटे के भीतर करीब 25 सिलेंडर को भरने की क्षमता होगी। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया प्लांट के बनने के बाद रिपन, केएनएच के लिए भी आपातकालीन समय में सप्लाई दी जाएगी। अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई लाने वाले ट्रक 140 सिलेंडरों को लाता है।
बर्फबारी के दौरान रास्तों में फंसने या दूसरे कारणों से ऑक्सीजन न आने के कारण कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। अब ऐसा नहीं होगा। बैठर में आरकेएस में काम कर रहे कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए सरकार के पास अप्रूवल के लिए भेजा गया है।
अस्पताल में 120 के करीब कांट्रेक्ट कर्मचारी हैं। गवर्निंग बॉडी में फैसला लिया गया है कि अब ठेकेदार के जरिये इन्हें भर्ती नहीं किया जाए। सिविल सप्लाई की ओर से दुकानों का किराया नहीं देने का मामला भी उठा। वाइस चेयरमैन प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेेल्थ ने बताया कि जल्द से जल्द इस बारे में सिविल सप्लाई के एमडी से बात की जाए।
आईजीएमसी, केएनएच में लगेंगे वाटर एटीएम
आईजीएमसी और केएनएच में मरीजों के लिए वाटर एटीएम लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार राज्य के अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये प्रयासरत है। आईजीएमसी और डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल टांडा में आपातकालीन वार्ड खोलने का निर्णय लिया गया है।
रोगियों को जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दरों पर दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वर्ष 2016-17 में वेतन और अन्य भत्तों पर 380 लाख रुपये व्यय का प्रावधान किया गया है। एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई फिल्मों एवं कीटों और केमिकल आदि के प्रापण पर 175 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मशीनों और उपकरणों के रख रखाव पर 205 लाख रुपये, दवाओं के प्रापण पर 150 लाख रुपये खर्च होंगे।
सर्जिकल लीनन स्ट्रेचर इत्यादि वस्तुओं पर 205 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। बैठक में विधायक सुरेश भारद्वाज, नगर निगम के महापौर संजय चौहान स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना, आईजीएमसी प्राचार्य अशोक शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद मौजूद रहे।