उल्लेखनीय है कि एक माह पहले कांगड़ा के नेताओं इंदु गोस्वामी, विपिन परमार, रमेश धवाला और पवन राणा के बीच राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते सियासी जंग सियासी चौखट पर थी। मुख्यमंत्री के कई प्रयासों के बाद इस सियासी युद्ध की धार उपचुनाव तक कुंद हुई थी।
मुनीश की एंट्री से कांगड़ा के कई नेता नाराज, पठानिया ने मुश्किल से थामा है गुबार
मुख्यमंत्री के कांगड़ा दौरे के दौरान कांगड़ा के व्यवसायी मुनीश शर्मा की भाजपा में एंट्री से स्थानीय नेता नाराज हो गए थे। नाराजगी इसलिए है कि मुनीश ने कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू की एंट्री करवाकर पूरे कांगड़ा को हाईजेक करने की कोशिश की है। विधायक राकेश पठानिया पहले से ही मंत्री न बनने से नाराज हैं। ऐसे में उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री के समक्ष कांगड़ा में गुटबाजी से पार पाना बड़ी चुनौती बन गई है।
नकारात्मक गतिविधियों पर जल्द लगना चाहिए विराम : शर्मा
राजनीतिक विश्लेषक एवं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त हिमाचल केसी शर्मा ने कहा कि कांगड़ा के राजनीतिक इतिहास को देखते हुए यह आवश्यक है कि पार्टी में पूर्ण एकता हो और गुटों का अभाव हो। सत्तापक्ष को चाहिए को उपचुनाव से पहले ऐसी नकारात्मक गतिविधियों पर जल्द विराम लगाया जाए।