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वीरभद्र के प्रयासों पर पानी न फेर दे संगठन सरकार की रार

Mon, 17 Apr 2017 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच बढ़ती रार पार्टी की चिंता बढ़ा रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री लोक लुभावनी योजनाएं के दम पर जनता के बीच सरकार की साख बढ़ाने में जुटे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन के साथ मतभेदों ने अभी से विपक्ष के हाथ चुनावी मुद्दा थमा दिया है।
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पिछले डेढ़ साल में सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों से लेकर अनुबंध कर्मियों, शिक्षकों के हित को लेकर कई अहम फैसले लिए, लेकिन बेरोजगारी भत्ते के मुद्दे पर संगठन और सरकार के बीच दिखी सियासी प्रतिस्पर्धा से मतभेद खुलकर सामने आ गए। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बीच लगातार बढ़ती तल्खी से अब दिल्ली आलाकमान भी चिंतित दिख रही है।

सत्ता बचाने के लिए सरकार ने कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं को फोकस में रखकर घोषणाओं का रोडमैप तैयार किया है, लेकिन संगठन के साथ तालमेल का अभाव मुख्यमंत्री की चुनावी रणनीति को पलीता लगाता दिख रहा है। 
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पिछले डेढ़ साल में तूफानी दौरे और लोक लुभावनी योजनाएं दे चुके हैं सीएम

पिछले दिनों बेरोजगारी भत्ते को लेकर पहले परिवहन मंत्री जीएस बाली और वीरभद्र सिंह, फिर वीरभद्र सिंह और सुक्खू के बीच चल रहे परोक्ष वाक युद्ध से पार्टी का कैडर चिंतित है। हाल ही में भोरंज विधानसभा उपचुनाव में भी पार्टी और सरकार के बीच की खाई फिर से सामने आ गई है।

मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ा, हालांकि बयानबाजी पर आलाकमान की नजरें टेढ़ी होते देख दोनों और से डैमेज कंट्रोल किया गया। उधर, दोनों के बीच की तल्खी का फायदा उठाने के लिए भाजपा कोई मौका नहीं चूक रही। जानकारों की मानें तो भाजपा इसका चुनाव में रणनीतिक फायदा उठा सकती है, जिसकी सर्वाधिक चिंता कांग्रेस आलाकमान को है।

नाम न लिखने की शर्त पर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि प्रदेश से लेकर केंद्र तक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता इस टकराव को लेकर चिंता जता चुके हैं, लेकिन टकराव कम होता नजर नहीं आ रहा। कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले चुनाव में सरकार की लाख अच्छी कोशिशों के बावजूद भाजपा को फायदा न मिल जाए।
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