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दान में मिली जमीनों को बेचने का हक मांग रहे साधु-संत

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हिमाचल में कुछ साधु-संत एवं धार्मिक संस्थाएं अब दान में मिली जमीन को बेचने की तैयारी में हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार से कुछ संस्थाएं अनुमति मांग रही हैं। हाल में एक नामी धार्मिक संस्था ने इसके लिए प्रदेश सरकार के पास आवेदन किया है। इस संस्था के पास प्रदेश में 150 बीघा से ज्यादा जमीन है। इसमें कुछ जमीन को यह संस्था अब बेचना चाह रही है।
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जमीन से मिलने वाली रकम को धार्मिक कार्यों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं जुटाने की बात आवेदन में कही गई है। आवेदन के बाद विभागीय स्तर पर इस बारे मंथन शुरू हो गया है। वर्ष 1971 के सीलिंग एक्ट में प्रावधान था कि हिमाचल में कोई भी व्यक्ति 150 बीघा से ज्यादा जमीन अपने पास नहीं रख सकता। जिस व्यक्ति के पास इससे ज्यादा जमीन थी, उस वक्त यह जमीन सरकार के नाम की गईं।
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धार्मिक संस्‍थाओं के पास अरबों की संपत्ति

वर्ष 2013 में सीलिंग एक्ट में संशोधन किया गया। इसमें धार्मिक संस्थाएं 150 बीघा से ज्यादा जमीन अपने पास रख सकतीं हैं, लेकिन जमीन बेचने का उन्हें अधिकार नहीं है। एक्ट के संशोधन में चाय के बगीचे, बिजली प्रोजेक्ट और उद्योग को राहत दी गई थी।

धार्मिक संस्‍थाओं के पास अरबों की संपत्ति
हिमाचल में धार्मिक संस्था के पास अरबों-खरबों की सैकड़ों बीघा जमीनें हैं। यह जमीनें संस्थाओं को लोगों ने दान में दी हैं। शिमला, हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना और कुल्लू जिले में कई संस्थाओं ने दान या सरकार से मिली जमीन पर निर्माण भी किया है।

'सीलिंग एक्ट में दान की जमीन को बेचा नहीं जा सकता है। सरकार को पहले एक्ट में संशोधन करना होगा और फिर केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी। अभी मामला मेरे ध्यान में नहीं है। जैसे ही फाइल आएगी, इस पर क्या करना है, सोचा जाएगा।'-ठाकुर कौल सिंह, राजस्व मंत्री
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