सरकारी जमीन पर बसे गरीबों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक
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कब्जे से जुड़ी शर्त में राहत देने के प्रस्ताव को नगर निगम सदन ने दी मंजूरी, अब सरकार लेगी अंतिम फैसला 3300 से ज्यादा परिवार रहते हैं ढारों और झोपड़ियों में
कब्जे का प्रमाण न होने से नहीं मिल रहा मालिकाना हक अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में सरकारी भूमि पर झुग्गी-झोपड़ियां और ढारे बनाकर रहने वाले 3300 गरीब परिवारों को जमीन का मालिकाना हक मिल सकता है। इसके लिए नगर निगम ने कब्जे से जुड़ी शर्त में राहत देने का फैसला लिया है। इसका प्रस्ताव अब मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा।
महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में वीरवार को हुई नगर निगम की मासिक बैठक में निगम प्रशासन ने इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए रखा। निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि पिछले साल इसके लिए शहर के गरीब परिवारों से आवेदन मांगें गए थे। काफी लोगों ने आवेदन भी किए लेकिन सिर्फ एक आवेदन ही सही पाया गया है। शहर में करीब करीब 3300 परिवार हैं लेकिन यह कब्जे का कोई दस्तावेज नहीं दे पाए हैं। सरकार की अधिसूचना के अनुसार ऐसे गरीब परिवार जो 21 फरवरी 1974 तक या उससे पहले से शिमला शहर में सरकारी जमीन पर कब्जा कर झुग्गी-झोपड़ी या ढारा बनाकर रह रहे हैं, उन्हें ही इस जमीन का मालिकाना हक मिलना है। लेकिन ज्यादातर लोग इस कब्जे का कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाए हैं। ऐसे में अब सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा कि इस शर्त में कुछ राहत दी जाए। यदि सरकार से शर्त में राहत मिलती है तो हजारों लोगों को जमीन का मालिकाना हक मिल सकता है। सदन ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी।
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गरीब परिवारों को मिलेगी 75 वर्ग मीटर जमीन
हिमाचल प्रदेश स्लमवासी अधिनियम 2022 के अनुसार गरीब परिवारों को कब्जा की गई 75 वर्ग मीटर तक की जमीन का मालिकाना हक दिया जाना है। शहर के कृष्णानगर वार्ड में ऐसे परिवारों की संख्या सबसे ज्यादा है। स्थानीय पार्षद बिट्टू कुमार कई बार इसे सदन में भी उठा चुके थे। अब इनके आग्रह पर यह प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है।
रेन शेल्टर से होगी कमाई जनता को मिलेगी सुविधा
शहर में बने 83 रेन शेल्टर नगर निगम अब ठेकेदार के हवाले करेगा। ठेकेदार इन पर विज्ञापन लगाएगा जिससे नगर निगम को भी कमाई होगी। दूसरी ओर ठेकेदार को सफाई, लाइट आदि का जिम्मा भी संभालना होगा। इसे आम जनता को भी सुविधा होगी। इसके भी टेंडर करने को मंजूरी दी है।
तहबाजारी नीति को भी मंजूरी
नगर निगम सदन में तहबाजारी नीति पर आई आपत्तियों और सुझावों पर भी चर्चा की गई। निगम प्रशासन ने कहा कि तहबाजारी का पंजीकरण आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र दोनों के आधार पर किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य जो सुझाव आए हैं, उन पर भी काम किया जा रहा है। सदन ने नई नीति को मंजूरी दे दी।