उत्तर भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा 19 अगस्त से शुरू होगी। यह दो सितंबर तक चलेगी। मणिमहेश यात्रा में इस बार पहली बार श्रद्धालुओं का पंजीकरण होगा। इसके लिए 20 रुपये शुल्क देना होगा। हर साल देश और विदेश से करीब तीन लाख श्रद्धालु यात्रा करने के लिए आते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ विभिन्न व्यवस्था के लिए शुक्रवार को उपायुक्त डीसी राणा की अध्यक्षता में बैठक हुई।
उपायुक्त ने कहा कि कोरोना काल के बाद इस साल मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो सकती है। सभी विभागों को तय समय में पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। हेलीटैक्सी 12 अगस्त से शुरू की जाएगी। बैठक में यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के पंजीकरण करने का निर्णय किया गया। चंबा से मणिमहेश डल झील तक क्षेत्र को 13 सेक्टरों में बांटा जाएगा। यहां पुलिस बल तैनात करने के लिए कहा गया। आम श्रद्धालुओं के लिए हड़सर कुगती परिक्रमा मार्ग से जाने की मनाही रहेगी।
किसी भी संस्था को सड़क के किनारे लंगर लगाने की अनुमति नहीं होगी। विद्युत परियोजनाओं के बांध क्षेत्र और महत्वपूर्ण स्थानों पर उचित ध्वनि प्रसारण यंत्रों के माध्यम के साथ असुरक्षित स्थानों पर चेतावनी चिह्न लगाने के भी निर्देश दिए। प्रतिबंधित पॉलीथिन में पैक पदार्थों के इस्तेमाल पर पाबंदी रहेगी। विभिन्न स्थानों पर राहत एवं बचाव टीम तैनात की जाएगी। इसमें एसडीआरएफ की टीम भी शामिल होगी। आपदा की स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन के टोल फ्री नंबर 1077 या व्हाट्सएप 98166-98166 पर सूचित करना होगा।
19 को रवाना होंगी दशनामी अखाड़ा और चरपट नाथ की छड़ियां
पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान चौरासी परिसर स्थित मंदिरों में पुजारी पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 19 अगस्त को जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर होने वाले छोटे न्हौण में सैकड़ों शिवभक्त पवित्र मणिमहेश झील में डुबकी लगाएंगे। दशनामी अखाड़ा और चरपट नाथ की छड़ियां विभिन्न पड़ाव पार करती हुईं बड़े न्हौण से पूर्व पवित्र मणिमहेश डल झील पर पहुंचेंगी। संचूई के शिव चेलों कर ओर से डल तोड़ने (झील को पार करने) की प्रक्रिया के साथ जन्माष्टमी का बड़ा शाही स्नान शुरू होगा।