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Shimla News: राशनकार्ड फर्जीवाड़ा, 300 लोगों के नाम काटे, अन्य पर जांच जारी

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जिले में 55,839 राशनकार्ड लाभार्थी पाए गए हैं संदेहजनक, हो सकते कई चौंकाने वाले खुलासे
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बीपीएल और अंतोदय अन्न योजना की जांच में खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बीपीएल और अंतोदय अन्न योजना के तहत बने राशनकार्ड में अपात्र लोगों के नाम हटाने का काम शुरू हो गया है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने अब तक करीब 300 राशनकार्ड धारकों के नाम हटा दिए हैं। अन्य कार्ड धारकों पर जांच जारी है।

जिला शिमला में सरकारी योजना के तहत बीपीएल और अंत्योदय अन्न योजना के 55,839 राशनकार्ड लाभार्थी संदेहजनक पाए गए हैं। यह लिस्ट सामने आने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। शहर, ग्रामीण और ब्लॉक स्तर पर इंस्पेक्टर इस कार्य को करने में जुटे हैं। इस सूची में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनकी की मौत हो चुकी है लेकिन फिर भी राशन जारी हो रहा है। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। बीपीएल परिवारों को राशन डिपो से हर महीने 19 किलो आटा और 15 किलो चावल सदस्यों के हिसाब से दिए जाते हैं। अंत्योदय अन्न योजना में 15 किलो चावल मुफ्त में उपलब्ध करवाए जाते हैं। आटा 18 किलो 800 ग्राम 1.20 रुपये प्रतिकिलो की दर से उपलब्ध करवाया जाता है। यही वजह है कि मुफ्त में राशन मिलने के कारण भी लोगों ने यह नाम राशनकार्ड से नहीं हटाए हैं और सरकारी राशन को डकार रहे हैं।
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राशनकार्ड मामले की चल रही है जांच
जिले में राशनकार्ड से जुड़े मामले पर गहन जांच चल रही है। अब तक 300 अपात्र नाम हटाए जा चुके हैं। बाकियों पर कार्यवाही जारी है। मृत व्यक्तियों के नाम हटाए गए हैं। वहीं जिनके पास जमीन अधिक है, उनकी पात्रता जांची जा रही है। कोशिश है कि सिर्फ सही और जरूरतमंद लोगों को ही सरकारी योजना का लाभ मिल सकें।
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- नरेंद्र धीमान, जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले।


18 साल से कम आयु के बना दिए मुखिया
विभाग की जांच में सामने आया है कि जिले में 591 राशनकार्ड में 100 से अधिक आयु वाले लाभार्थी हैं। वहीं 18 वर्ष से कम आयु के राशनकार्ड धारक मुखिया बनाए गए हैं। 4083 साइलेंट राशन कार्ड लाभार्थी और 429 डुप्लीकेट राशन कार्ड लाभार्थी शामिल हैं। इसके अलावा 43,957 राशनकार्ड धारक ऐसे हैं जिनके पास ढाई एकड़ से ज्यादा भूमि है। 890 लाभार्थी ऐसे हैं जिनकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक है। 13 लाभार्थी जीएसटीएन, 5613 लाभार्थी वाहन स्वामित्व वाले और 171 लाभार्थी ऐसे हैं जो कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय में डायरेक्टर आदि के तौर पर पंजीकृत हैं।
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