यही नहीं, जिन मंत्रियों की प्रोग्रेस कमजोर है, उनसे इसका कारण पूछने की की बात कही थी। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि जयराम सरकार के मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए जाने के साथ-साथ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल हो सकता है। किशन कपूर धर्मशाला से विधायक हैं और जयराम सरकार में मंत्री हैं।
सांसद की शपथ लेने से पहले वह मंत्री और विधायक पद से रिजाइन करेंगे। भाजपा का मानना है कि अगर कांगड़ा से मंत्री बनाया जाता है तो राकेश पठानिया दावेदार सबसे मजबूत हैं। वह चार विधानसभा में चुनकर आए हैं। कांगड़ा जिले के ही रमेश धवाला वर्तमान में जयराम सरकार में योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं, वह भी मंत्री पद की दौड़ में हैं। यह धूमल सरकार में मंत्री रहे हैं।
जयराम सरकार में विरोध के बाद उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया था। मंत्री न बनाए जाने से कहीं न वह भी नाराज चल रहे हैं। जिला सिरमौर और हमीरपुर को एक भी मंत्री नहीं मिला है। ऐसे में विधानसभा के अध्यक्ष राजीव बिंदल और नरेंद्र ठाकुर भी मंत्री पद की दौड़ में हैं।
यह जरूरी नहीं कि जहां सीट खाली हुई है, वहीं से मंत्री बनेगा। मंडी और धर्मशाला से छोड़कर भी किसी और जिले से मंत्री बनाए जा सकते हैं। - जयराम ठाकुर, मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश