जूझती रही सुक्खू सरकार, अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लेने पड़े कड़े फैसले
हिमाचल प्रदेश में अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार ने कई कड़े फैसले लेने की शुरुआत कर दी है। खर्च घटाने की दिशा में कुछ कदम उठाए गए हैं। हिमाचल भवन, सदन और राज्य सरकार के आवास गृहों में मंत्रियों, विधायकों समेत अन्य वीआईपी को सस्ती दरों पर कमरे मिलते थे। इनके लिए विशेष रियायतें दी गईं। इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ी। सीएम खुद इलेक्ट्रिक गाड़ी में आवाजाही कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से लीज राशि का भुगतान न करने पर वाइल्ड फ्लॉवर हॉल को कब्जे में लेने जैसे साहसपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। बोडों-निगमों में अध्यक्षों- उपाध्यक्षों की ताजपोशियों को लंबित किया गया है। कैबिनेट विस्तार भी आहिस्ता- आहिस्ता किया गया। मंत्री का एक पद अभी भी खाली है। 2011-12 के बाद स्टांप ड्यूटी पर शुल्क बढ़ाया है। शपथ-पत्र और नकल लेने के लिए लगाए जाने वाले आवेदनों पर तीन गुना ज्यादा स्टांप शुल्क लेने का निर्णय हुआ है। स्टांप ड्यूटी को दस मुना बढ़ाया है। हालाकि, महिलाओं को इसमें विशेष रियायत दी गई है।