हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में शुक्रवार सुबह से देर शाम तक लगातार बारिश ने आलू की फसल को खतरे में डाल दिया है। जिले में जारी आलू निकालने का काम बारिश के बाद रुक गया है। जमीन में अत्यधिक नमी के कारण आलू को जमीन से बाहर निकालने के लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना होगा। चिंता की बात यह है कि आलू की फसल की दो माह वाली फसल आवश्यकता से अधिक समय दिए जाने पर उसके फटने का खतरा भी रहता है। इस कारण आलू खराब हो जाता है और मंडियों में उसे उचित भाव नहीं मिल पाता।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में ऊना में आलू की पटाई का दौर जोरों पर चल रहा है। प्रतिदिन करीब 50 गाड़ियां पंजाब के अमृतसर, लुधियाना, चंडीगढ़ और दिल्ली मंडी में पहुंच रही हैं। यानी 1800 क्विंटल के आसपास आलू रोजाना मंडी भेजा जा रहा, लेकिन बारिश ने आलू की पटाई का सिलसिला रोक दिया है। करीब पांच घंटे तक लगातार जारी रही बारिश के जमीन में आवश्यकता से अधिक नमी आ गई हैं। गीली जमीन से आलू निकलना बेहद जटिल रहता है और उससे फसल खराब होने का डर भी रहता है। ऐसे में अब किसानों को जमीन सूखने का इंतजार करना होगा।
मंडियों में घटेगी नए आलू की खेप
पंजाब और दिल्ली मंडी में ऊना के नए आलू की सप्लाई बीते 10 दिन से जारी है। अब यह सप्लाई अगले कुछ दिन रुक जाएगी। ऐसे में जब दोबारा सप्लाई जाएगी तो शुरुआत में अच्छे दाम मिलने की भी उम्मीद है, लेकिन उस समय बड़ी संख्या में किसान फसल की पटाई में जुटेंगे, जिससे अच्छी खासी मात्रा में आलू मंडियों में पहुंचेगा। क्योंकि तब तक बड़े किसान भी आलू की पटाई शुरू कर देंगे।
किसान विनोद कुमार, सुखदेव सैनी, अजय कुमार, मदनलाल ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए बारिश अच्छी है, लेकिन आलू की फसल को अभी अधिक पानी की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि फसल लगभग तैयार है। ऐसे में जितना अधिक समय तक आलू जमीन में रहेगा, उससे गुणवत्ता पर असर पड़ने का खतरा बढ़ता है। अगर आने वाले दिनों में भी मौसम की यही स्थिति रही तो फसल पर खतरा बढ़ जाएगा।
जिले में आलू की फसल अच्छी स्थिति है। बारिश के बाद मौसम साफ होने से फसल को अधिक असर नहीं होना चाहिए। हालांकि गीली जमीन में फसल की पटाई नहीं हो पाती। गेहू की बिजाई वाले खेतों में इस समय बारिश बेहद जरूरी थी। इससे पौध विकसित होने में मदद मिलेगी।
-डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।