रेल में बिना सफर कराए सालाना औसतन 2500 करोड़ रुपये की कमाई करने के मामले पर रेलवे मंत्रालय ने आखिरकार संज्ञान ले लिया है। रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने पैसेंजर मार्केटिंग बोर्ड के कार्यकारी निदेशक को जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। आरटीआई के माध्यम से रिफंड पॉलिसी में बदलाव की मांग करने वाले मंडी निवासी एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता सुजीत स्वामी को ईमेल से सूचना दी गई है।
सुजीत स्वामी को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गहन जांच का आश्वासन दिया है। सुजीत स्वामी ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी जुटाकर खुलासा किया था कि हर साल महज टिकट रद्द करने वाले उपभोक्ता से रेलवे 2500 करोड़ रुपये की कमाई करता है।
यह राशि टिकट लेने वाले उपभोक्ता के खाते में ट्रांसफर करने के लिए स्वामी ने सुझाव दिए थे। उन्होंने इस मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इतना ही नहीं, इसी मामले को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता दिल्ली स्थित जंतर मंतर में एक दिवसीय सांकेतिक अनशन करने की तैयारी में थे।
एक वर्ष से रिफंड पॉलिसी में बदलाव की चल रही मांग
मानवाधिकार कार्यकर्ता सुजीत स्वामी लगभग एक साल से रेलवे की रिफंड पॉलिसी के बारे में सवाल उठा रहे हैं। वे रेलवे और पीएमओ को रिफंड पॉलिसी में परिवर्तन के सुझाव भेज चुके हैं। लेकिन रेलवे ने इस पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया।
रेलवे से वार्ता पर टिका सांकेतिक अनशन
सुजीत स्वामी ने कहा कि रेलवे मंत्री से मिलने का समय पीएमओ पोर्टल एवं उन्हीं के मेल पर मांगा है ताकि वह अपनी बात को विस्तार से रख सकें। उन्होंने रेलवे मंत्री के कदम का स्वागत किया है।
हालांकि, अभी तक जंतर मंतर पर धरने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। अब यह बात रेलवे मंत्रालय पर टिकी है कि वह मानवाधिकार कार्यकर्ता को बातचीत के लिए बुलाते हैं या नहीं।