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Shimla News: पुलिस का घेरा तोड़ एमसी सदन में घुसे प्रदर्शनकारी, जमकर की नारेबाजी

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नगर निगम के इतिहास में पहली बार सदन में प्रदर्शन, बर्खास्त किए 41 सैहब कर्मचारियों की सेवा बहाल न करने से खफा हैं प्रदर्शनकारी
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नगर निगम के सदन में जा रहे महापौर का भी किया घेराव
धक्के खाते हुए बैठक में पहुंचे पार्षद-अफसर, क्यूआरटी बुलाई
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम के इतिहास में शुक्रवार को पहली बार प्रदर्शनकारी सड़क से सदन तक पहुंच गए। सैहब कर्मचारियों और सीटू कार्यकर्ताओं ने सदन के गेट पर मेयर सुरेंद्र चौहान को घेर लिया और तीखी नोंकझोंक के बीच उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी कर दी।

मेयर के जवाब से नाखुश प्रदर्शनकारी यहीं नहीं रुके और मौके पर तैनात पुलिस का घेरा तोड़कर और धक्कामुक्की करते हुए सदन के भीतर पहुंच गए। यहां भी काफी देर तक नारेबाजी चलती रही। हालात तनावपूर्ण होता देख मेयर ने फोन पर पुलिस अधिकारियों से बात की। पुलिस की क्यूआरटी मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को सदन से बाहर निकाला। वहीं, मासिक बैठक में शामिल होने जा रहे पार्षद और अफसर भी भीड़ के बीच धक्के खाते हुए सदन तक पहुंचे। बर्खास्त किए 41 सैहब कर्मचारियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर सीटू और सैहब कर्मचारी यूनियन ने दोपहर 2:00 बजे सीटीओ चौक पर प्रदर्शन किया। दोपहर 2:15 बजे प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी रैली निकालते हुए बचत भवन के बाहर पहुंचे। यहां जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। 2:20 बजे यह सभी बचत भवन में जाने लगे जहां 2:30 बजे से निगम की मासिक बैठक होनी थी। पुलिस ने इन्हें गेट पर रोक लिया। 2:40 बजे मेयर सुरेंद्र चौहान, डिप्टी मेयर उमा कौशल समेत कई कांग्रेसी पार्षद सदन में जाने लगे तो कर्मचारियों ने नारेबाजी तेज कर दी। मेयर पर धोखा देने के आरोप लगाए। इस पर मेयर भड़क गए। उन्होंने कहा कि जब मांगें मान ली हैं तो प्रदर्शन क्यों, सदन की गरिमा भंग मत करो। काफी देर तक तीखी नोकझोंक चलती रही।
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सीटू के राज्याध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, गदर फ्रंट के नेता रवि कुमार समेत सैहब कर्मचारियों ने कहा कि कर्मचारियों की बहाली के निर्देश देकर मेयर अब मुकर रहे हैं। यह तानाशाही है। मेयर सुरेंद्र चौहान सदन की ओर जाने लगे तो प्रदर्शनकारी भी जबरन सदन में जाने लगे। स्थिति पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो गई। सदन के भीतर पहुंचकर नारेबाजी भी शुरू हो गई। इस हंगामे के बीच मेयर ने 2:40 बजे सदन का कार्रवाई शुरू कर दी। सदन में एक ओर नारेबाजी तो दूसरी ओर कार्रवाई चलती रही। 2:42 बजे क्यूआरटी पहुंची और प्रदर्शन कर रहे लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद सीटीओ चौक पर शाम 4:00 बजे तक प्रदर्शन चलता रहा। सदन में मेयर और पार्षदों ने इस घटना पर एतराज जताया। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर और बिट्टू कुमार ने कर्मचारियों की सेवाएं बहाल कर विवाद खत्म करने की मांग की। उधर पुलिस ने वीडियोग्राफी कर इस मामले में जांच शुरू कर दी है।



सदन में ऐसी घटना शर्मनाक
सदन में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि आते हैं। जनता की समस्याओं पर फैसले होते हैं लेकिन सीटू और सैहब कर्मचारियों ने सदन की गरिमा तक नहीं रखी। कर्मचारियों की मांगें पूरी की जा रही है। सेवा बहाली की प्रक्रिया भी चल रही है। फिर भी ऐसा विरोध शर्मनाक है।
सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला


समझौते के बाद भी सेवा बहाल नहीं मेयर ने बैठक में कहा था कि सभी बर्खास्त कर्मचारियों की सेवाएं बहाल होंगी लेकिन एक हफ्ते बाद भी कोई फैसला नहीं लिया। कर्मचारियों को धोखा दिया है। सेवा बहाली की फाइल लटकाई जा रही है।
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-जसवंत सिंह, अध्यक्ष सैहब कर्मचारी यूनियन


सदन में नहीं जा सकते आम आदमी
विधानसभा की तर्ज पर नगर निगम सदन की भी गरिमा है। यहां जन प्रतिनिधियों और उनके सवालों के जवाब देने आए अधिकारियों के अलावा अन्य व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। ऐसा करने पर आपराधिक केस दर्ज हो सकता है। इस मामले में भी अब कानूनी कार्रवाई तय है।
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