विधायकों को शपथ दिलाने के लिए प्रोटेम स्पीकर बनाए गए विधायक चंद्र कुमार लोकसभा चुनाव में शांता कुमार को भी हरा चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से 14वीं लोकसभा के लिए कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार को पराजित किया। वह जिला कांगड़ा के ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा जिला कांगड़ा से वरिष्ठतम और कद्दावर नेता हैं। वह आठ दिसंबर 2022 को जवाली निर्वाचन क्षेत्र से चौदहवीं विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
जवाली के विधायक चंद्र कुमार का जन्म 8 मई, 1944 को जिला कांगड़ा के तहसील जवाली के गांव ढान में दिवंगत बेली राम के घर में हुआ। उनके पिता एक कृषक थे। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पंजाब व हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हासिल की। उन्होंने एमए, एमएड, बीए, एलएलबी तक की शिक्षा प्राप्त की है। राजनीति में प्रवेश करने से पूर्व वह शिमला स्थित सेंट बीट्स कॉलेज में एक प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे। बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उनके बेटे नीरज भारती भी दो बार विधानसभा के सदस्य रहे हैं और प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव के पद पर रहे हैं। चंद्र कुमार वर्ष 1982, 1985, 1993, 1998 और 2003 में विधानसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए हैं। चंद्र कुमार 1982 में एचआरटीसी के उपाध्यक्ष नामित किए गए। उन्होंने 1982 से 1985 तक स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, जनसंपर्क उप मंत्री, 14 अप्रैल 1984 से मार्च 1985 तक वन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, मार्च 1985 से 1989 तक कृषि, कला, भाषा एवं संस्कृति, मत्स्य राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, 1989 से 1990 सिंचाई, जनस्वास्थ्य, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा मंत्री, 1993 से 1998 और 6 मार्च 2003 से 31 मई 2004 तक वन मंत्री बने रहे।
पहला चुनाव वर्ष 1977 में आजाद प्रत्याशी के रूप में लड़ा और 500 से भी कम मतों के अंतर से चुनाव में पिछड़ गए। उसके बाद 1982 से आज तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता के रूप में विद्यमान हैं। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कोषाध्यक्ष, महासचिव तथा उपाध्यक्ष जैसे उच्च पदों पर तैनात रहे हैं। कई वर्षों तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहे हैं।