प्रदेश सरकार ने अतिक्रमण को रोकने और शहरों में विकास कार्यों को कराने का नया फार्मूला निकाला है। प्रदेश के 56 शहरों में अब भवनों की जीआईएस (जियोग्राफिक इन्फॉरमेशन सिस्टम) मैपिंग होगी। इससे माध्यम से ही प्रदेश में भवनों की गणना होगी।
शहरों में सड़कों के निर्माण, लिफ्ट, एस्कलेटर, स्ट्रीट लाइट्स, सार्वजनिक शौचालय आदि विकासात्मक कार्य जीआईएस मैपिंग से होगी। प्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट पर 60 से 70 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगा रही है।
शहरी विकास विभाग में शुक्रवार को आयोजित बैठक में इस प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा हुई है। इसमें शहरी निकायों के कार्यकारी अधिकारी के अलावा प्रोजेक्ट संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
नगर निगम की परिधि में इस कार्य को नगर निगम करेगा जबकि अन्य शहरी निकायों में कार्यकारी अधिकारी इस योजना को सिरे चढ़ाएंगे।
शहरों से प्रतिदिन उठेंगे डंपर
बैठक में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने पर विशेष बल दिया गया। शहरवासी सफाई को लेकर काफी शिकायतें कर रहे हैं, इसके चलते इसमें कार्यकारी अधिकारी (ईओ) को निर्देश दिए गए कि शहरों में डंपरों पर नंबर लगेगा। ये इसलिए ताकि पता चल सके कि कौन सा डंपर कितने दिन में उठाया जाना है।
टैक्स एकत्र करने में होगी आसानी
प्रदेश के शहरी निकायों में कितने भवन है, विभाग के पास इसका सही आंकड़ा नहीं हैं। प्रदेश के कई घरों से शहरी विकास विभाग को टैक्स आ रही है जबकि कई भवन मालिक अभी भी टैक्स नहीं दे रहे हैं। विभाग का दावा है कि शहरों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है बावजूद लोग टैक्स देने में आनाकानी करते हैं।
प्रदेश शहरी निकायों में भवन मालिकों की जीआईएस मैपिंग होगी, इसके आधार पर ही विकास कार्य होंगे। टैक्स न देने वाले भवन मालिक भी पकड़ में आएंगे।
- कैप्टन जेएम पठानिया, निदेशक शहरी विकास विभाग