सब्सिडी बढ़ाने के बाद डीएपी खाद के दामों में एकाएक आई गिरावट से हिमाचल प्रदेश के लाखों किसानों को इसका लाभ होगा। हिमाचल प्रदेश में डायमोनियम फास्फेट की वार्षिक खपत 1200-1500 मीट्रिक टन है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को डायमोनियम फास्फेट उर्वरक पर अनुदान में 140 प्रतिशत वृद्धि कर राहत दी है। उन्होंने इसके लिए उनका आभार जताया है।
सीएम ने कहा कि वर्तमान में किसानों को इस उर्वरक पर मिल रहे अनुदान को 500 रुपये प्रति बैग से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति बैग कर किया गया है। कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके मूल्य में वृद्धि के बावजूद किसानों को यह उर्वरक 1200 रुपये प्रति बैग के पुराने मूल्य पर उपलब्ध होगा। डायमोनियम फास्फेट भारत में दूसरा सबसे अधिक प्रयोग होने वाला उर्वरक है। हिमाचल में डायमोनियम फास्फेट की वार्षिक खपत 1200-1500 मीट्रिक टन है।
किसान इस उर्वरक को सामान्य रूप से रबी के मौसम में आलू और गेहूं की फसल में बुआई से ठीक पहले या बुआई के समय प्रयोग करते हैं। हिमाचल में ऊना, कांगड़ा और पांवटा साहिब और नालागढ़ के कुछ क्षेत्रों में इस उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। गत वर्ष डायमोनियम फास्फेट का वास्तविक मूल्य 1700 रुपये प्रति बैग था। इस पर केंद्र सरकार 500 रुपये प्रति बैग का अनुदान दे रही थी। हाल ही में डायमोनियम फास्फेट में प्रयोग होने वाले फास्फोरिक एसिड, अमोनिया इत्यादि के मूल्य में 60 से 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस कारण डायमोनियम फास्फेट की प्रति बैग कीमत 2400 रुपये हो गई थी।
वर्तमान में प्रदेश में उर्वरक की खपत 63 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में उर्वरक की खपत 63 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। राज्य में उर्वरक वितरण प्रणाली सहकारिता नेटवर्क के अंतर्गत है। उर्वरक का वितरण 2143 सहकारी सभाओं और डिपो धारकों के माध्यम से सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार ने उर्वरक वितरण कार्य हिमफेड को सौंपा है। इफ्को को भी उसकी 620 संबद्ध सभाओं के माध्यम से आपूर्ति कार्य के लिए मंजूरी दी गई है।