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प्रोग्रेसिव लीडरशिप समिट: रुपाला बोले- किसानों की सफलता कहानियों का हो दस्तावेजीकरण

Sat, 18 Dec 2021 09:21 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन

सार

नौणी विवि में आयोजित प्रोग्रेसिव लीडरशिप समिट-2021 कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों को प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के निर्यात में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है जहां ऐसे उत्पादों की लगातार मांग बढ़ रही है। 
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केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने प्राकृतिक खेती की पहल के लिए हिमाचल सरकार की प्रशंसा कर जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सिक्किम के प्रयासों को भी सराहा। उन्होंने नौणी विवि में आयोजित प्रोग्रेसिव लीडरशिप समिट-2021 कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों को प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के निर्यात में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है जहां ऐसे उत्पादों की लगातार मांग बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि नवीन कृषि-नवाचारों के साथ-साथ किसानों की सफलता की कहानियों के दस्तावेजीकरण किया जाए ताकि भविष्य की नीति तैयार करने के लिए उन्हें सरकार के साथ साझा किया जा सके।

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रूपाला ने स्वदेशी पशुधन को लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और पशुधन टीकाकरण और उनकी समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए मोबाइल वैन की बात कही। वहीं इस मौके पर प्रदेश के कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभा को बताया कि राज्य में 1.53 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने उनकी सरकार की फसल बीमा और मुआवजा योजना के बारे में बात की। उन्होंने सभा को बताया कि राज्य में पानी के सदुपयोग के लिए अलग से तालाब प्राधिकरण की स्थापना की गई है। 
 
हिमाचल ने जीता पहला पुरस्कार
हिमाचल ने मृदा स्वास्थ्य और कृषि विपणन और प्रथाओं में सर्वश्रेष्ठ पहल के लिए पुरस्कार जीता, जबकि हरियाणा ने ब्रांड विकास और जोखिम प्रबंधन के लिए पुरस्कार जीता। केसर संवर्धन और उत्पादन के लिए जम्मू और कश्मीर को सम्मानित किया गया, जबकि पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश को पशु स्वास्थ्य में सर्वश्रेष्ठ पहल का पुरस्कार जीता, जबकि उत्तराखंड को जैविक खेती के लिए पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा विभिन्न श्रेणियों के तहत शिखर सम्मेलन में कुल 42 पुरस्कार वितरित किए गए जिसमें राज्य, शैक्षिक संगठन, कॉर्पोरेट कृषि और संबद्ध क्षेत्र, प्रगतिशील किसान, गांव, किसान उत्पादक संगठन, कृषि पत्रकारिता पुरस्कार (जागरूकता और समाधान-उन्मुख), सरकारी संगठन, पीएसयू, एकेडमी में उत्कृष्टता और कृषि भविष्य रत्न पुरस्कार शामिल रहे। 
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ये रहे मौजूद 
इस कार्यक्रम के दौरान पेरी-अर्बन एग्रीकल्चर पर एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसमें नौणी विवि के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति डॉ. बीआर कम्बोज, शेर ए कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू के वीसी डॉ. जेपी शर्मा सहित कृषि-उद्योग के प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने पेरी-अर्बन कृषि के भविष्य पर चर्चा की।

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प्राकृतिक खेती से जुड़ेगी हर पंचायत: कंवर

कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि अगले वर्ष के अंत तक प्रदेश की हर पंचायत प्राकृतिक खेती से जुड़ेगी। अभी तक 3516 पंचायतें जुड़ चुकी हैं। प्राकृतिक खेती से प्रदेश की सभी 3615 पंचायतों को जोड़ने के लिए मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। वीरेंद्र कंवर शनिवार को डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विवि नौणी में प्रोग्रेसिव एग्री लीडरशिप समिट कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि जिस तरह शनिवार को नौणी विवि में किसान मेले का आयोजन किया जा रहा है, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस मेले में किसानों की सफलता की कहानी यहां पर दिखाई गई है, वह एक नई सोच आने वाले समय में किसानों को देगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी क्षेत्र है। यहां पर किसानों की अपनी समस्याएं हैं। अब कृषि के बजाय बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि आज हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में पूरे देश में हिमाचल का तीसरा स्थान है, वहीं विश्व स्तर पर 10वें स्थान पर हिमाचल है। हिमाचल में अब तक प्राकृतिक खेती से 1 लाख 53 हजार से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। वहीं एक लाख बीघा से ज्यादा क्षेत्रफल पर खेती की जा रही है। उन्होंने सड़क पर छोड़े जा रहे गोवंश को लेकर चिंता जाहिर कर कहा कि आने वाले समय में प्रदेश की सड़कों पर कोई भी व्यक्ति गोवंश न छोड़े, इसके लिए सख्त कानून बनाया जाएगा।  
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