राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुबाथू की डिंपल कड़ी मेहनत और लगन से जमा दो की कला संकाय की परीक्षा में 441 अंक लेकर प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। डिपंल का लक्ष्य टीचर बनकर गरीब और बेसहारा बच्चों के जीवन में शिक्षा की लौ जगाना है। एक मामूली परिवार में पली डिंपल के पिता मेसन मिस्त्री का काम करते हैं और मां गृहणी हैं। डिंपल का कहना है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद उसके मां बाप ने पढ़ाई के लिए कभी नहीं रोका।
बेहतर पढ़ाई के लिए उन्होंने हर संभव सहायता प्रदान की। वह अपनी आगे की पढ़ाई डिग्री कालेज सोलन से कर रही हैं। डिंपल ने बताया कि उन्होंने कला संकाय में किसी तरह की ट्यूशन हासिल नहीं की है। स्कूल की पढ़ाई को बेहतर तरीके से पढ़ा।
समझ न आने पर बार बार शिक्षकों के साथ विमर्श किया। शिक्षकों ने भी इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए भरसक सहायता की। होनहार छात्रा के पिता राम दास एक साधारण परिवार से हैं। वह मिस्त्री की दिहाड़ी लगाकर परिवार का गुजारा चला रहे हैं।
मुझे यह नहीं पता क्या पढ़ती है डिंपल
12वीं में प्रदेश में चौथे स्थान पर आने की खबर डिंपल के पिता को अमर उजाला ने ही दी थी। रिपोर्टर ने उन्हें उनकी बेटी की कामयाबी के बारे में बताया तो कहा कि सब बेटी की मेहनत है। उन्हें यह भी पता नहीं कि वह क्या पढ़ती है। परिणाम की उन्हें जानकारी नहीं है। पहला फोन आपका ही आया है।
कहा कि उनकी दिहाड़ी से परिवार का गुजर बसर हो रहा है। करीब 300 से 400 रुपए दिहाड़ी वह प्राप्त करते हैं। साथ ही कृषि योग्य उपजाऊ भूमि से निकलने वाली नगदी फसलों से गुजारा चल रहा है। कन्या को अभिशाप समझने वालों के लिए किसी सीख से कम नहीं। उनका कहना है कि वह अपनी बेटी को खूब पढ़ाना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े। बेटी अनमोल है.....इसका जीता जागता उदाहरण डिंपल की कामयाबी है।
पूरी मदद करती हैं मां
डिंपल की मां कांता ने कहा कि वह अपनी बेटी को एक ऊंचे मुकाम में देखना चाहती हैं। भले ही वह अधिक पढ़ी लिखी नहीं हैं लेकिन अपनी बेटी को वह पढ़ाई का माहौल देने की हर संभव कोशिश करती है। उन्होंने बताया कि कभी भी घर के काम काज को पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। अकेले डिंपल को घर का काम संभालने नहीं दिया।
नीलम ने पिता के सपने किए साकार
जिला सिरमौर की संगड़ाह तहसील के पावरा गांव निवासी नीलम कुमारी ने जमा दो आर्ट्स की परीक्षा में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान हासिल कर अपने पिता का नाम रोशन किया है। नीलम के पिता दौलत राम दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं। जबकि माता सुमित्रा देवी मिड डे मील में कार्यरत है।
नीलम के पांच और भाई बहन हैं। लेकिन नीलम उनमें सबसे होशियार है। जो पढ़ाई के साथ अपने घर के काम व खेतीबाड़ी में भी अपने परिवार का पूरा हाथ बंटाती है। आगे पढ़कर नीलम आईएएस आफिसर बनकर देश सेवा करना चाहती है। नीलम के पिता दौलत राम ने बताया कि उन्हें ‘अमर उजाला’ की ओर से 15 जुलाई को शिमला में प्रतिभा सम्मान समारोह-2014 का निमंत्रण पत्र मिला है।
वह समारोह में शामिल होने के लिए अपनी बेटी के साथ शिमला के लिए रवाना हो चुके हैं। वह इस समारोह में अपनी बेटी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथ से सम्मानित होता देखना चाहत हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यकीन है कि गुरबत के दिनों से उनकी बेटी की विलक्षण प्रतिभा जरूर उभरेगी। उन्हें इस बात का गर्व है कि बेटी ने पिता के परिश्रम को याद रखा और खुद भी पढ़ाई में अधिक मेहनत की। उन्हें अपनी बेटी की उपलब्धि पर नाज है। वह अपनी बेटी को आगे पढ़ाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।