निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के मकसद से संशोधित किए जा रहे 1997 के एक्ट को कैबिनेट बैठक में लगाने के लिए विधि विभाग की राय का इंतजार है। संभावित है कि शनिवार शाम तक विधि विभाग की राय शिक्षा विभाग को मिल जाएगी। 23 फरवरी को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल में इस प्रस्ताव को रखा जाना है। सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में निजी शिक्षण संस्थान नियामक एक्ट 1997 को संशोधित करने का फैसला लिया है।
इसके तहत फीस निर्धारण के लिए एसएमसी, अभिभावकों या किसी अन्य कमेटी को शामिल किया जाएगा। वर्तमान एक्ट के तहत निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। निजी स्कूलों की फीस को लेकर लॉकडाउन के दौरान काफी हल्ला हुआ है। सरकार ने लॉकडाउन के दौरान सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली के निर्देश दिए थे।
इन आदेशों के खिलाफ जाते हुए कई निजी स्कूलों ने स्कूल बंद होने के बावजूद कई तरह के फंड वसूले। इसको लेकर पूरे प्रदेश में अभिभावकों ने प्रदर्शन किए। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को कई संगठनों की ओर से निजी स्कूलों के खिलाफ ज्ञापन भी सौंपे गए। इसी कड़ी में सरकार ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए 1997 के एक्ट में संशोधन करने का फैसला है। विधानसभा में संशोधित एक्ट पेश करने से पहले कैबिनेट से इसकी मंजूरी ली जानी है।