इससे हिमाचल के सेब बागवानों के बागवानी उत्पादों को अच्छे रेट मिलेंगे, क्योंकि फलों की खपत बढ़ेगी, वहीं इससे एचपीएमसी भी अपनी आमदनी में इजाफा कर सकेगी। अभी ये तय नहीं किया गया है कि निजी कंपनी के साथ किस तरह का और कैसे समझौता किया जाना है।
विचार-विमर्श के लिए ये मामला अगली कैबिनेट बैठक में भी जा सकता है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद शराब निर्माता कंपनियों से इस काम के लिए टेंडर भी मंगवाए जा सकते हैं। न्यूनतम दरों पर ये काम करने को तैयार होने वाली कंपनी के साथ एचपीएमसी समझौता कर सकता है।
एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक और प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा का कहना है कि इसके लिए जल्दी ही रूपरेखा तैयार की जा रही है। ये वक्त की जरूरत है। कई उत्पादों की तरह एचपीएमसी का वाइन भी इससे मशहूर होगा। बागवानों और एचपीएमसी की भी आमदनी बढ़ेगी।