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वन संपदा को लूट रहीं निजी कंपनियां

Mon, 14 Apr 2014 12:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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निजी कंपनियां प्रदेश की वन संपदा को लूट रही हैं। जंगल और खेत से हर साल निकलने वाली 40 हजार क्विंटल से अधिक की जड़ी-बूटियों को औने-पौने दामों पर खरीदा जा रहा है।
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इससे किसानों और सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस पर अंकुश लगाने को राज्य जैव विविधता बोर्ड ने तैयारी कर ली है। बोर्ड के अनुसार प्रदेश में 2006 तक 25 मीट्रिक टन जड़ी-बूटियों का उत्पादन होता था।

पिछले साल तक उत्पादन बढ़कर लगभग 40 हजार मीट्रिक टन (40 हजार क्विंटल) तक पहुंच गया था। दलालों के कारण ग्रामीणों और सरकार को जड़ी-बूटियों की उचित कीमत नहीं मिल रही है।
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बेहद किफायती दरों पर इनकी बिक्री होती है। इनसे बनने वाली औषधियों की कीमत काफी अधिक होती है। इस पूरे नेटवर्क पर जैव विविधता बोर्ड ने विस्तृत अध्ययन किया।

इसमें उक्त तथ्य सामने आया है। इस पर रोक लगाने को बोर्ड स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध कराने की कवायद कर रहा है। दवा कंपनियां सीधे किसानों से जड़ी-बूटियां खरीद सकेंगी।

इससे किसानों और सरकार को उचित कीमत मिल सकेगी। बोर्ड निजी कंपनियों से बात भी कर रहा है।

ऐसे लूट रहीं कंपनियां

कंपनियों ने कुछ एजेंट बनाए हैं। ये स्थानीय लोगों से बेहद सस्ती दरों पर जड़ी-बूटियां खरीद लेते हैं। उसके बाद थोड़ा मुनाफा कमाकर इन्हें कंपनियों को बेच देते हैं।
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