करुणामूलक आश्रित परिवारों के लोग वीरवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिलने राज्य सचिवालय शिमला पहुंचे। उन्होंने पूर्व सरकार की कमियों और खामियों को उजागर किया। पूर्व में करुणामूलक आश्रितों की ओर से की गई 432 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल के बारे में भी जानकारी दी गई। करुणामूलक नौकरियों की बहाली की भी गुहार लगाई गई। प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार की अध्यक्षता में सैकड़ों लोग करुणामूलक नौकरी की फरियाद लेकर सचिवालय पहुंचे। उहोंने कहा कि पिछली सरकार के समय में भी करुणामूलक आश्रितों ने काफी लंबा संघर्ष किया था।
इनकी ओर से 432 दिन कि भूख-हड़ताल की गई, लेकिन पूर्व सरकार इनको एक साथ नौकरियां देने में असमर्थ रही। उस समय विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस सरकार ने करुणामूलक नौकरी बहाली मुद्दे को जोरों-शोरों से उठाया था और चुनावी वायदे व कांग्रेस के मेनिफेस्टो में भी इस मुद्दे को प्राथमिकता मिली थी। आगामी कैबिनेट में पॉलिसी संशोधन करने और 5 लाख आय सीमा निर्धारित करने और एक व्यक्ति सालाना आय शर्त को हटाने की भी मांग उठाई। कोटे की शर्त को हमेशा के लिए हटाने और सभी विभागों, बोर्डों और निगमों में भी नौकरियां दिलाने की मांग उठाई गई।