फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपभोक्ताओं को राहत: सरकारी राशन डिपुओं में नहीं बढ़ेंगे पैकेट बंद चीनी के दाम

Wed, 29 Sep 2021 08:15 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश में साढ़े 18 लाख राशनकार्ड धारक हैं। सरकार इन्हें आटा, चावल, तीन दालें (दाल चना, माश और मलका), दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों) चीनी और एक किलो नमक दे रही है। सरकार उपभोक्ताओं को हर महीने करीब 600 ग्राम प्रति व्यक्ति चीनी मुहैया करवा रही है। गरीब परिवारों को 13 रुपये किलो और करीब 30 रुपये प्रति किलो एपीएल परिवारों को चीनी दी जा रही है। प्रदेश सरकार चीनी पर 10 से 20 रुपये तक सब्सिडी दे रही है। 
विज्ञापन
चीनी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश के राशनकार्ड धारक उपभोक्ताओं को अब डिपुओं में वर्तमान में चल रहे दाम पर ही पैकेट बंद चीनी मिलेगी। प्रदेश सरकार ने पैकेट बंद चीनी के दाम बढ़ाने से हाथ खींच लिए हैं। सरकार ने पैकेट का खर्च खुद उठाने का फैसला लिया है। अभी डिपुओं में उपभोक्ताओं को खुली चीनी दी जा रही है। बरसात के चलते चीनी गीली हो जाती है। ऐसे में चीनी के सैंपल फेल होने की संभावना होती है। लोग भी गीली चीनी को लेकर शिकायत करते हैं। ऐसे में सरकार ने पैकेट बंद चीनी देने का फैसला लिया है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: मंत्री वीरेंद्र कंवर बोले- पांच जिलों में दालचीनी के एक लाख पौधे रोपेगा विभाग

प्रदेश में साढ़े 18 लाख राशनकार्ड धारक हैं। सरकार इन्हें आटा, चावल, तीन दालें (दाल चना, माश और मलका), दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों) चीनी और एक किलो नमक दे रही है। सरकार उपभोक्ताओं को हर महीने करीब 600 ग्राम प्रति व्यक्ति चीनी मुहैया करवा रही है। गरीब परिवारों को 13 रुपये किलो और करीब 30 रुपये प्रति किलो एपीएल परिवारों को चीनी दी जा रही है। प्रदेश सरकार चीनी पर 10 से 20 रुपये तक सब्सिडी दे रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


600 ग्राम और एक किलो पैकेट बंद में आएगी चीनी
हिमाचल के डिपुओं में उपभोक्ताओं को 600 ग्राम और एक किलो पैकेट बंद में चीनी आएगी। हरियाणा से ही पैकेट बंद चीनी हिमाचल आएगी। 

कैबिनेट से वापस हुआ था मामला
पैकेट बंद चीनी का मामला कैबिनेट मेें भी गया था। इसमें पैकेट बंद पर 4 रुपये तक खर्चा आना था। ऐसे में यह रुपये या तो प्रदेश सरकार को वहन करने थे, यहां इसका बोझ जनता पर पड़ना था। ऐसे में इस मामले पर निर्णय नहीं हो पाया था।  

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें