क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) जल्द ही कोर्ट में पहली चार्जशीट दाखिल करने जा रही है। इस चार्जशीट में दुबई फरार सुभाष और गिरफ्तार आरोपी अभिषेक, हेमराज, सुखदेव को मुख्य आरोपी बनाया गया है। ये तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि सुभाष को दुबई से लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी सप्ताह इसे कोर्ट में दायर किया जाना है। एसआईटी ने जांच में खुलासा किया है कि क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में ये चारों मुख्य आरोपी है।
ठगी का पैसा चारों में बराबर बंटता था। हिमाचल और बाहरी राज्यों में ठगी का कारोबार फैलाने का जाल इन्होंने ही बुना है। लोगों के निवेश की चेन भी इन आरोपियों ने बनाई है। लोगों को 11 महीने के भीतर डबल पैसा देने का दिलासा भी यही लोग दिलाते रहे। एजेंटों को कमीशन दी जाती थी। निवेशकों को भी यही आरोपी विदेश घुमाने ले जाते थे। क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर आरोपियों ने लोगों से पैसा लगाकर खुद करोड़ोपति बन गए। ठगी के पैसे से इन आरोपियों ने करोड़ों की संपत्तियां बनाई हैं। इन चारों आरोपियों की मंडी, जीरकपुर में प्लॉट और फ्लैट है। जिस वेबसाइट से यह सारा खेल होता था, पुलिस एसआईटी ने इसे कब्जे में ले रखा है।
अब तक ठगी मामले में जितने भी लोगों ने निवेश किया है उनके नाम पते, मेल आईडी और फोन नंबर पुलिस के पास है। क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में 2500 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई है। पुलिस के निशाने पर 80 ऐसे लोग हैं जो जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी ठगी से से दो -दो करोड़ से ज्यादा की राशि कमाई है। चार पुलिस कर्मचारियों समेत सात आरोपितों की संपत्तियों की जांच चल रही है। अभी तक चार आरोपितों की संपत्तियों को सीज किया किया गया है। यह संपत्ति 12 करोड़ रुपये की है। जांच में पता चला है कि सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में कार्यरत 5 हजार कर्मचारियों ने भी क्रिप्टो में निवेश किया है। कुछ कर्मचारियों ने तो इसके लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी है और इसी में काम करना शुरू कर दिया।