किन्नौर में 960 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट को साल 2006 में ब्रैकल कॉरपोरेशन को आवंटित किया था। इस प्रोजेक्ट को न बनाने पर इसे 2009 में ब्रैकल से वापस ले लिया। इसी बीच, ब्रैकल ने इस परियोजना का 280 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम हिमाचल सरकार को देना था, जो समय पर नहीं दिया।
ब्रैकल के साथ समझौते के बाद यह प्रीमियम अदानी कंपनी ने जमा किया। ब्रैकल और अदानी की साझेदारी को सरकार ने मंजूरी नहीं दी। बाद में ब्रैकल ने इस पैसे को वापस अदानी को लौटाने की सरकार से दरख्वास्त की।
इसी बीच रिलायंस कंपनी ने भी पेशकश की थी कि यह प्रोजेक्ट उसे दिया जाए तो अपफ्रंट प्रीमियम वह जमा कर देगा, लेकिन बाद में वह भी पीछे हट गया। अब जयराम सरकार ने कैबिनेट बैठक में जंगी थोपन-पोवारी प्रोजेक्ट एसजेवीएनएल को देने का निर्णय लिया है।