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ब्रैकल कॉरपोरेशन के खिलाफ एफआईआर की तैयारी

Tue, 13 Nov 2018 10:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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बहुचर्चित जंगी थोपन-पोवारी बिजली प्रोजेक्ट मामले में ब्रैकल कॉरपोरेशन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी मिलने पर विजिलेंस ब्यूरो ने सरकार से कॉरपोरेशन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है।

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सूत्रों का कहना है प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है कि कंपनी ने प्रोजेक्ट पाने को फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया, जबकि उस समय के अधिकारियों पर दस्तावेजों की सत्यता नहीं परखने का आरोप है।

ऐसे में मामला दर्ज होने पर इस कंपनी के अलावा सरकार में उच्च पदों पर बैठे कुछ अधिकारी भी जांच की जद में आ सकते हैं। राज्य सरकार पहले ही ब्रैकल मामले में अदानी कंपनी को 280 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम लौटाने के पिछली सरकार के मंत्रिमंडल के फैसले पर जांच कर रही है। 

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साल 2006 में ब्रैकल कॉरपोरेशन को आवंटित किया

प्रतीकात्मक तस्वीर
किन्नौर में 960 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट को साल 2006 में ब्रैकल कॉरपोरेशन को आवंटित किया था। इस प्रोजेक्ट को न बनाने पर इसे 2009 में ब्रैकल से वापस ले लिया। इसी बीच, ब्रैकल ने इस परियोजना का 280 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम हिमाचल सरकार को देना था, जो समय पर नहीं दिया।

ब्रैकल के साथ समझौते के बाद यह प्रीमियम अदानी कंपनी ने जमा किया। ब्रैकल और अदानी की साझेदारी को सरकार ने मंजूरी नहीं दी। बाद में ब्रैकल ने इस पैसे को वापस अदानी को लौटाने की सरकार से दरख्वास्त की।

इसी बीच रिलायंस कंपनी ने भी पेशकश की थी कि यह प्रोजेक्ट उसे दिया जाए तो अपफ्रंट प्रीमियम वह जमा कर देगा, लेकिन बाद में वह भी पीछे हट गया। अब जयराम सरकार ने कैबिनेट बैठक में जंगी थोपन-पोवारी प्रोजेक्ट एसजेवीएनएल को देने का निर्णय लिया है।
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