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युक्तिकरण की तैयारी: हिमाचल के आईटीआई में जरूरत से अधिक तैनात शिक्षकों के होंगे तबादले

Fri, 13 Sep 2024 10:03 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में आवश्यकता से अधिक नियुक्त शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और गैर शिक्षकों के युक्तिकरण की तैयारी शुरू कर दी है। 
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आईटीआई - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में आवश्यकता से अधिक नियुक्त शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और गैर शिक्षकों के युक्तिकरण की तैयारी शुरू कर दी है। शहरों से सटे संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात से कई अधिक शिक्षक तैनात हैं। इन शिक्षकों को अब अन्य संस्थानों में शिफ्ट किया जाएगा। कुछ आईटीआई मर्ज करने की भी तैयारी है। विद्यार्थी संख्या कम होने पर संस्थान भी मर्ज किए जा सकते हैं। प्रदेश में 152 आईटीआई हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विभागीय अधिकारियों से इस माह के अंत तक इसको प्रस्ताव मांगा है।

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तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिला मुख्यालयों से सटे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कई ट्रेड के आवश्यकता से अधिक शिक्षक हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों की कमी है। ऐसे में अब शिक्षकों का युक्तिकरण किया जाएगा। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से सभी संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों की कम संख्या वाले संस्थानों को मर्ज करने का भी विचार है। तकनीकी शिक्षा मंत्री ने ऐसे संस्थानों की रिपोर्ट निदेशालय से तलब की है। कम विद्यार्थियों की संख्या वाले आईटीआई से नजदीकी आईटीआई कितनी दूरी पर है, वहां कितने दाखिले हैं। इसको लेकर भी रिपोर्ट देने को कहा गया है। जिन संस्थानों को मर्ज किया जाएगा, वहां से ट्रेड भी दूसरे संस्थान में शिफ्ट होंगे।
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जल्द लेंगे फैसला
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की मजबूती के लिए शिक्षकों के युक्तिकरण और संस्थानों को मर्ज करने का विचार है। जल्द ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालयों के अलावा अन्य क्षेत्रों में स्थिति संस्थानों में भी शिक्षकों के पर्याप्त पद होना आवश्यक है। ऐसे में शहरों में पास ही नौकरी करने की जगह शिक्षकों को अन्य क्षेत्रों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
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