भाजपा नेता व पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल
भाजपा के स्थापना दिवस पर बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल तथा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। धूमल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कांग्रेस और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के संकल्प को प्रदेश भाजपा का हर कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ पूरा करेगा।
विधानसभा के विपक्ष लाउंज में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश के विकास में भाजपा का बड़ा योगदान रहा है। वर्तमान की केंद्र सरकार भी देश को नए आयाम तक ले जाने के लिए काम कर रही है। भाजपा का गठन 6 अप्रैल, 1980 को मुंबई अधिवेशन के दौरान हुआ था।
इसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष चुने गए थे। देश की अकेली ऐसी पार्टी है, जिसने अपने गठन के तीस साल के अंदर केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। इससे पहले भी भाजपा ने महज 16 साल में केंद्र में अपने सहयोगियों संग मिलकर सरकार बना ली थी।
बताया कि आज पार्टी पौने बारह करोड़ कार्यकर्ताओं की मदद से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। देश में सबसे ज्यादा सांसद और विधायक भी पार्टी के हैं। सत्ती ने कहा कि केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। ऐसे में हिमाचल के कार्यकर्ता प्रदेश में भ्रष्टाचार से घिरी वीरभद्र सरकार को सत्ता से दूर रखने के लिए काम करेंगे।
हिम्मत दिखाकर अपना पद छोड़ें वीरभद्र : शांता
भाजपा वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सांसद शांता कुमार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफे की मांग की है। कहा कि अब वीरभद्र सिंह हिम्मत दिखाकर अपने पद को छोड़ दें। सलाह दी कि हटाए जाने की बजाय स्वयं शालीनता से हट जाना अधिक अच्छा है। मुख्यमंत्री पद से उनके न हटने से राजनेताओं की छवि खराब हो रही है।
यह देश का दुर्भाग्य है कि नेताओं को कुर्सी पर बैठना तो आता है, लेकिन ठीक समय पर सम्मान के साथ कुर्सी छोड़नी नहीं आती। शांता ने 1980 का अपना ही उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र में इंदिरा गांधी के आते ही प्रदेश में दल-बदल शुरू हुआ था। वह खरीद-फरोख्त से सरकार बचा सकते थे, लेकिन अल्पमत में आते ही अपने पद से इस्तीफा देकर सिनेमाघर में फिल्म देखने चले गए थे।
जिस शान से कुर्सी पर बैठे थे, उसी शान से कुर्सी छोड़ दी थी। उसी समय दिल्ली से आडवाणी का फोन आया था और उनको सराहते हुए कहा कि कौन सी फिल्म देखी तो इस पर उन्होंने कहा कि जुगनू। लिहाजा, वीरभद्र सिंह को शान से पद से हट जाना चाहिए।
हिमाचल की राजनीति एक दुर्भाग्यपूर्ण टकराव और अस्थिरता के मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है। कोई रचनात्मक काम नहीं हो रहे हैं। विकास के सारे काम रुके पड़े हैं। केंद्र की शानदार योजनाएं लागू नहीं हो रही हैं। वीरभद्र मामले में बड़े वकील कुछ देरी तो करवा सकते हैं, लेकिन वह आरोपों से बच नहीं सकते।