हिमाचल प्रदेश में हुए अफसरशाही के तबादलों में सरकार ने युवाओं और अनुभवी अधिकारियों को अधिमान दिया है। एक साल की सुक्खू सरकार ने तबादले करने में संयम का परिचय देते हुए अफसरों को परखने के बाद जिम्मेवारी दी है। पूर्व की सरकारों में अकसर सत्ता संभालते ही सबसे पहले जिलों के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक बदले जाते रहे हैं। इसके विपरीत मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने ऐसा नहीं किया। अब भी लोकसभा चुनाव के चलते चुनाव आयोग के निर्देशों पर एक स्थान पर तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके अफसरों को ही बदला गया है। अगर अभी लोकसभा चुनाव नहीं होते तो शायद तबादलों में और समय लगता। मुख्यमंत्री ने तबादले करने से पहले करीब दो सप्ताह तक उच्च अधिकारियों के साथ हर पद को लेकर मंत्रणा की। उसके बाद बुधवार रात को तबादलों की सूची जारी की गई। विशेष सचिव कार्मिक और वित्त का कार्यभार लंबे समय से संभाल रहे आईएएस अधिकारी अमरजीत सिंह के अनुभव का लाभ लेने के लिए उन्हें सीएम ने अपने गृह जिला हमीरपुर में उपायुक्त लगाया है।
अमरजीत सिंह कई सरकारों में कार्मिक विभाग का जिम्मा देखते आए हैं। वह पूर्व की वीरभद्र सिंह सरकार में नगर निगम शिमला के आयुक्त भी रह चुके हैं। इसी तरह अनुभवी अधिकारी अनुपम कश्यप को शिमला का उपायुक्त लगाया गया है। अनुपम के पास भी लंबा प्रशासनिक अनुभव है। इसके अलावा युवा अफसर हेमराज बैरवा, तोरुल एस. रवीश और अपूर्व देवगन के काम को देखते हुए इन्हें अब बड़े जिलों की जिम्मेवारी सौंपी है। हेमराज बैरवा को हमीरपुर के बाद अब कांगड़ा, तोरुल एस. रवीश को किन्नौर के बाद अब कुल्लू, अपूर्व देवगन को चंबा के बाद अब मंडी में उपायुक्त लगाया गया है। आईटी निदेशक मुकेश रेपसवाल को चंबा, बिजली बोर्ड के निदेशक वित्त एवं कार्मिक को किन्नौर, निदेशक कौशल विकास निगम जतिन लाल को ऊना में उपायुक्त लगाया गया है। पुराने उपायुुक्तों और युवा अफसरों राघव शर्मा, निपुण जिंदल, आशुतोष गर्ग और अरिंदम चौधरी की सचिवालय में विभिन्न प्रशासनिक विभागों में सेवाएं ली जाएंगी।
रिक्त हुए महकमों में अभी कई अफसरों की होंगी नियुक्तियां
प्रदेश में हुए तबादलों के बाद अब रिक्त हुए कई महकमों में नियुक्तियां होंगी। विशेष सचिव कार्मिक, निदेशक आईटी, निदेशक परिवहन और प्रबंध निदेशक इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन के पद रिक्त हो गए हैं। इन महकमों को संभाल रहे अधिकारियों को सरकार ने उपायुक्त लगा दिया है।