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Congress Protest: राहुल के समर्थन में विधानसभा से लेकर सड़कों तक किया प्रदर्शन, प्रतिभा को हिरासत में लिया

Fri, 24 Mar 2023 09:05 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

प्रतिभा सिंह ने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने के लोकसभा सचिवालय के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार के दबाव में जल्दबाजी में उठाया गया कदम है। 
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विधानसभा परिसर में कांग्रेस का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के समर्थन में शुक्रवार को विधानसभा परिसर से लेकर सड़कों तक कांग्रेस ने प्रदर्शन किए। भोजनावकाश के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अगुवाई में विधानसभा परिसर में मंत्रियों और विधायकों ने नारेबाजी की। जिला और ब्लॉक स्तर पर भी कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के साथ खड़ी है। लोकतंत्र में अगर कोई सच की आवाज उठा रहा है तो वे राहुल गांधी हैं। सच्चाई की आवाज को दबाया जा रहा है। भारत जोड़ो यात्रा कर राहुल गांधी ने पूरे देश को जोड़ने का काम किया है। इनके परिवार के दो प्रधानमंत्रियों ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। भाजपा राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक दल ने केंद्र सरकार के फैसले का आज विरोध किया है।

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उधर, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों व सभी ब्लाक स्तर पर धरना प्रदर्शन किए। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर गुजरात के एक न्यायालय की ओर से मानहानि के मामले में उनके खिलाफ दिए गए फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया गया। शिमला में धरना पार्टी मुख्यालय के बाहर किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजनीति से प्रेरित व बदले की भावना से कांग्रेस नेताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे बनाए जा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं प्रवक्ता देवेंद्र बुशैहरी ने कहा कि इतने बड़े लोकतांत्रिक देश में विपक्षी पार्टी के लोग अपनी बात लोकसभा व राज्यसभा में नहीं उठा सकते, ऐसी तानाशाही वाली सरकार आजादी के बाद पहली बार देखने को मिली है। अदाणी मामले की जांच करवाने से केंद्र सरकार बच रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस राहुल गांधी के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।

प्रतिभा सिंह को पुलिस ने  हिरासत में लिया
राहुल गांधी पर मानहानि के एक मामले में कोर्ट के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्यों के संसद मार्च में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय नेताओं के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उधर, प्रतिभा सिंह ने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने के लोकसभा सचिवालय के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार के दबाव में जल्दबाजी में उठाया गया कदम है। सरकार का यह कदम पूरी तरह तानाशाही भरा है। कांग्रेस इस तानाशाही के खिलाफ किसी भी जन आंदोलन से पीछे नहीं हटेगी। प्रतिभा सिंह ने कहा कि लोकसभा का यह फैसला संसदीय परंपराओं के भी विपरीत है। देश में लोकतंत्र के हनन का यह प्रत्यक्ष प्रमाण है। 
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राहुल गांधी से डरी है केंद्र सरकार : राठौर
 कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि राहुल गांधी से केंद्र सरकार डरी हुई है। भाजपा पर निशाना साधते हुए राठौर ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र में ऐसा पहली बार हुआ है। अभी सूरत कोर्ट ने फैसला सुनाया ही है। इसमें कानून की लंबी प्रक्रिया है। उन्हें अपील करने का समय भी दिया गया है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने के रास्ते भी अभी खुले हैं। इसी बीच लोकसभा सचिवालय ने जल्दबाजी में राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने का फैसला ले लिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की आवाज दबाने के लिए एक सोची समझी साजिश रची गई है। भारत जोड़ो यात्रा के बाद से भाजपा की जमीन खिसकना शुरू हो गई है। अदाणी प्रकरण को लेकर सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।

राहुल गांधी ने ओबीसी के बारे में आपत्तिजनक बातें कीं : भाजपा
 भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी और विधायक पवन काजल ने कहा कि राहुल गांधी ने चार साल पहले उनके समाज के खिलाफ सार्वजनिक रूप से जो अपमानजनक बातें की थीं। उस संदर्भ में अदालत ने उन्हें जो सजा सुनाई है, उसका वे स्वागत करते हैं। अदालत का फैसला यह दर्शाता है कि देश का कानून और देश का संविधान सबसे ऊपर है और उसकी नजर में देश के सभी नागरिक समान हैं। अदालत का निर्णय यह भी सिद्ध करता है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि अपराध किया है तो उसे सजा जरूर मिलेगी। ओबीसी समाज को गाली देना और देश के ओबीसी समाज को गाली देना राहुल गांधी अधिकार नहीं हो सकता। जब कोर्ट इसको लेकर आपको सजा सुनाती है तो विक्टिम कार्ड नहीं खेल सकते।

राहुल गांधी ने ओबीसी समाज के बारे में जो अनर्गल और आपत्तिजनक बातें की थीं। उसकी उन सबने तब भी निंदा की थी। वे आज भी निंदा कर रहे हैं, लेकिन अदालत की ओर से सजा सुनाने के बावजूद जिस तरह से राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के नेता उन अपमानजनक बातों को सही ठहरा रहे हैं, वह बताने के लिए काफी है कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं की मंशा क्या है और ओबीसी समाज सहित सभी ओबीसी समाज के बारे में उनकी सोच क्या है। राहुल गांधी अभी भी राजशाही सोच से बाहर नहीं निकले हैं। उन्होंने कहा कि उनके समाज के खिलाफ देश के एक बड़े नेता का ऐसा निंदनीय बोलना उन्हें क्या शोभा देता है? क्या यह देश के संविधान का अपमान नहीं है? क्या यह आत्मसम्मान के साथ जीने वाले सभी लोगों का अपमान नहीं है? क्या राहुल गांधी देश से और संविधान से इतने बड़े हो गए हैं कि उन्हें गाली देने का उन्हें अधिकार मिल गया है? माफी मांगना तो दूर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कांग्रेस के तमाम नेता जिस तरह से इसे सही ठहराने में जुटे हुए हैं, इससे यह सिद्ध होता है कि वे अपमान ही अपना नैतिक धर्म समझते हैं। कहा कि राहुल गांधी ये मानना छोड़ दें कि वह और उनका परिवार देश से ऊपर है। यदि राहुल गांधी और देश की जनता को लगता है कि वे देश के संविधान और देश के कानून से ऊपर हैं तो यह उनकी भूल है।

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न्यायालय के फैसले के आधार पर रद्द हुई राहुल की संसद सदस्यता : धूमल

देश के संविधान और कानून से ऊपर कोई भी नहीं है। चाहे वह कोई भी क्यूं न हो। न्यायालय का निर्णय सर्वमान्य है। न्यायिक फैसले के तहत कानून के आधार पर ही लोकसभा से राहुल गांधी की सदस्यता रद्द हुई है, न की राजनीतिक आधार पर। कांग्रेस पार्टी को इस पर व्यर्थ में होहल्ला और शोर शराबा नहीं करना चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म होने के मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए शुक्रवार को मीडिया में यह बात कही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से लोकसभा सचिवालय की कार्रवाई को गलत बोलना उचित नहीं है और न ही न्यायसंगत है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के अनुसार बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। हालांकि, तब जनप्रतिनिधि अपील करने अगले कोर्ट में जाते थे और उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती थी। लेकिन, वर्ष 2013 में लिली थॉमस बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून में बदलाव करते हुए कहा कि 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर तत्काल प्रभाव से जनप्रतिनिधि चाहे विधायक हो या सांसद हो, की सदस्यता खत्म हो जाएगी। भले ही वह अपील के लिए बड़े कोर्ट में जाते रहें। उस वक्त यूपीए की सरकार देश में थी और मनमनोहन सिंह तत्कालीन प्रधानमंत्री।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन मनमोहन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को बदलने के लिए एक अध्यादेश लाया था कि किसी भी जनप्रतिनिधि को 5 वर्ष या उससे अधिक की सजा होगी तभी उसकी सदस्यता रद्द होगी। लेकिन, तब राहुल गांधी ने उस अध्यादेश को बकवास बताते हुए सरेआम उसकी कॉपी फाड़ दी थी। जिसकी बहुत चर्चा भी हुई थी। इस कानून को लेकर यूपीए सरकार का अध्यादेश लागू नहीं हो पाया और बाद में लालू प्रसाद यादव की सदस्यता गयी। फिर आजम खान की गई और बाद में उनके बेटे की सदस्यता रद्द हुई। इस प्रकार आज तक सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के आधार पर कई लोकसभा और विधानसभा सदस्यों की सदस्यता जा चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय के उसी फैसले के आधार पर अब राहुल गांधी पर कार्रवाई हुई है।
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