सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण
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चुनावी बॉन्ड को सुप्रीम कोर्ट ने गैर कानूनी घोषित किया है। सत्ताधारी दलों की ओर से चंदा दो-धंधा लो की प्रथा को चलाया जा रहा है। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह सबसे बड़ा घोटाला है। यह बात विश्वकर्मा भवन मंडी में स्वराज अभियान, संयुक्त किसान मोर्चा, भारत जोड़ो अभियान एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान के सौजन्य से एक बैठक में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कही। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने लाखों करोड़ की परियोजनाओं को हासिल करने के लिए सत्ताधारी राजनीतिक दलों को रिश्वत देने के लिए चुनावी बॉन्ड को इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा कि कई कंपनियां जो ईडी, सीबीआई और आईटी विभाग की जांच के दायरे में थी, उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी को दान दिया और जांच से मुक्त हो गई। कुछ दवा कंपनियां जो ड्रग कंट्रोलर के अनुसार घटिया और जानलेवा दवाएं बना रही थी, उन्हें उत्पादन की अनुमति दे दी गई। प्रशांत भूषण ने बताया की चुनावी बॉन्ड भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, रिश्वत को बढ़ावा देता है और समान अवसर को बाधित करता है। एक तरफ चुनाव आयोग ने बयान दिया कि 60 प्रतिशत पोलिंग हुई है फिर दूसरी तरफ बताया कि 66 प्रतिशत हुई है। जिससे संदेह पैदा होता है कि ईवीएम की अदला बदली भी संभव है।