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प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में एक भी प्रोफेसर नहीं

Fri, 13 Nov 2015 11:38 AM IST
प्रवीण कुमार/अमर उजाला, हमीरपुर
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प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में एक भी प्रोफेसर नहीं है। राज्य में करीब सौ स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय हैं। सभी कॉलेजों में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर ही हैं। प्रोफेसर (आचार्य) पदनाम न मिलने से प्रदेश के हजारों कॉलेज प्रवक्ताओं में सरकार के प्रति रोष है।
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वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक यह पूरी नहीं हो पाई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने वर्ष 2006 में सभी राज्यों की सरकारों को महाविद्यालयों में प्रोफेसर पदनाम और वित्तीय लाभ देने के निर्देश जारी किए थे।

यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक हर कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर की कुल संख्या का 10 फीसदी प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति का प्रावधान है। पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों ने यूजीसी के सुझाव को अमलीजामा पहनाते हुए महाविद्यालयों में इसे लागू कर दिया, लेकिन हिमाचल में यूजीसी के इस सुझाव को अभी लागू नहीं किया है।
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प्रदेश में वर्तमान में 90 से अधिक सरकारी महाविद्यालय हैं, जहां करीब 1000 एसोसिएट प्रोफेसर और लगभग 3000 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। यही नहीं, सरकारी महाविद्यालयों में प्रिंसिपल की नियुक्ति में भी आरएंडपी नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप हैं। कॉलेज प्रिंसिपल के लिए पीएचडी की अनिवार्यता है, लेकिन प्रदेश के अधिकांश कालेजों के प्रिंसिपल इस योग्यता को पूरी नहीं कर पा रहे।

प्रोफेसर पदनाम से यह पड़ रहा फर्क- सरकारी महाविद्यालयों में प्रोफेसर को 10 हजार रुपये ग्रेड पे, अन्य वित्तीय लाभ मिलते हैं। प्रोफेसर पदनाम उनकी वरिष्ठता को दिखाता है। असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर को 9000 रुपये ग्रेड पे व अन्य वित्तीय लाभ मिलते हैं। प्रोफेसर पदनाम न मिलने से कॉलेज लेक्चरर की वरिष्ठता को दर्शाना मुश्किल है। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग और आयुर्वेदिक महाविद्यालयों में प्रोफेसर के पद हैं।

हिमाचल सरकारी कॉलेज टीचर एसोसिएशन कई बार सरकार और शिक्षा विभाग से प्रोफेसर पदनाम देने की मांग कर चुकी है, लेकिन अभी तक इसे पूरा नहीं किया गया है। अन्य राज्यों के डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसर के पद हैं। कॉलेज प्रिंसिपल की नियुक्ति में भी मतभेद हैं।
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-डा. राजेश यादव, अध्यक्ष, एचपीसीटीए

कॉलेज टीचर एसोसिएशन की प्रोफेसर के पदनाम की मांग सरकार के ध्यान में है। प्रदेश में इसके अलावा यूजीसी की अन्य गाइडलाइन लागू कर दी गई हैं।
-पीसी धीमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग
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