भाजपा हो या कांग्रेस शिमला शहर में आज तक दोनों पार्टियां पार्किंग की समस्या का स्थायी हल नहीं कर पाईं हैं। कई पार्किंग बनने के बावजूद समस्या जस की तस है। पर्यटन सीजन के दौरान तो हालात और बिगड़ जाते हैं।
शिमला में एंट्री से पहले ही पर्यटक पार्किंग की सुविधा की जानकारी लेते हैं। अगर पार्किंग न मिल पाए तो मजबूरन सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करते है। इससे घंटों शहर की लाइफलाइन जाम हो जाती है।
पार्किंग सुविधा मिल जाए तो सैलानियों को लूटा जाता है। चुनावी साल में हर बार पार्टियां इस समस्या से निजात दिलाने के दावे तो करती हैं, लेकिन होता कुछ नहीं।
पर्यटन सीजन होने पर दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा से लाखों की तादाद में पर्यटक हर साल परिवार और दोस्तों के साथ शिमला घूमने आते हैं। लेकिन, पार्किंग का अभाव उन्हें काफी परेशान करता है।
पार्किंग के अभाव में सड़कों पर खड़ी होती हैं गाड़ियां
शिमला शहर में पार्किंग का अभाव है। माननीयों ने अपनी गाड़ियां खड़ी करवाने के लिए तो पार्किंग सुविधा ली है। लेकिन जो गाड़ियां शहर में प्रवेश करती हैं, उनमें से कई सड़क किनारे खड़ी रहती हैं। नियमों की अवहेलना होने के कारण तो पर्यटकों को अगले दिन गाड़ियां लेने के लिए पुलिस से संपर्क कर चालान कटवाने के बाद ही गाड़ियां छुड़वानी पड़ती हैं।
येलो लाइन के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं गाड़ियां
शहर में गाड़ियां पार्क करवाने को लेकर पेड पार्किंग सुविधा तो दी है। लेकिन यहां गाड़ियां खड़ी करना सुरक्षित नहीं हैं। येलो लाइन में खड़ी की गईं गाड़ियां कई बार बड़ी गाड़ियों की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।