हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए कभी भी आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों में टिकटों के लिए खींचतान तेज हो गई है। भाजपा के लिए टिकट आवंटन की राह हर गुजरते दिन के साथ मुश्किल होती जा रही है।
प्रचार अभियान को हल्का सा विराम देकर पार्टी अब प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में जुट गई है। पार्टी की इस बार प्रत्याशी चयन प्रक्रिया वर्ष 2012 के मुकाबले बिल्कुल अलग है।
प्रदेश लीडरशिप की जगह केंद्रीय नेतृत्व ही अंतिम सूची तय करेगा। हालांकि, भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के अधीन चयन समिति गठित कर दी है, लेकिन ये समिति निर्णय लेने से अधिक टीम शाह को सुझाव देने की भूमिका में ही रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक कांगड़ा जिले में टिकटों को लेकर सर्वाधिक घमासान मचा है। किसी भी सीट पर आधा दर्जन से कम दावेदार नहीं हैं। त्रिस्तरीय सर्वेक्षण और चयन प्रक्रिया से कई विधायक भी अंतिम सूची से बाहर होने की कगार पर हैं।