शहर के छोटा शिमला समेत जिले के कई थानों के सरकारी वाहन कंडम होने से परेशानियों से जूझ रहे पुलिस कर्मचारी सरकारी वाहन के बिना मौके पर पहुंचना भी मुश्किल
क्षेत्र में पेट्रोलिंग का काम भी हो रहा है प्रभावित अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी समेत जिला शिमला में कई थाने बिना सरकारी वाहन के चल रहे हैं। हालत यह है कि इन थानों में पुलिस के लिए अपने जरूरी कामकाज निपटाना मुश्किल हो गया है। मजबूरी में पुलिस कर्मी एनडीपीएस समेत अन्य आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किए जाने वाले आरोपियों को बसों और निजी वाहनों से अदालत में पेशी और मेडिकल के लिए ले जाने को मजबूर हैं।
ऐसी स्थिति में आरोपियों के पुलिस कस्टडी से भागने की आशंका रहती है। शहर के छोटा शिमला पुलिस स्टेशन में पिछले दो महीने से सरकारी गाड़ी नहीं है। पुराने वाहन के कंडम होने के बाद स्टाफ को कामकाज में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पुलिस स्टेशन के तहत प्रदेश सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास और राजभवन जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इसके बावजूद कई किलोमीटर का शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा भी इसी थाने के तहत आता है। सरकारी वाहन नहीं होने के कारण पुलिस कर्मचारियों को क्षेत्र में नियमित गश्त करने में दिक्कतें आ रही हैं।
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सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ ही शहर में चोरियों की घटनाएं भी बढ़ना शुरू हो जाती हैं। इसको देखते हुए क्षेत्र में रात्रि गश्त और पेट्रोलिंग बेहद जरूरी है। हाल ही में शिवनगर में रात के समय स्थानीय लोगों ने चोरी करते हुए दो लोगों को पकड़ा और इसकी सूचना देर रात पुलिस को दी। रात के समय गाड़ी नहीं होने के कारण पुलिस को कड़ी मशक्कत के बाद घटनास्थल पर पहुंचना पड़ा। इसी तरह से जिले के अन्य थानों में भी सरकारी वाहन नहीं होने के कारण पुलिस कर्मचारियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक मामलों की जांच में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने बताया कि कुछ थानों को हाल ही में गाड़ियां उपलब्ध करवाई गई है जबकि अन्य थानों को भी जल्द वाहन उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया चल रही है।
एनकोर्ड की बैठक में भी उठा था मामला
जिला शिमला की कुछ दिन पहले हुई एनकोर्ड की बैठक में भी पुलिस थानों में गाड़ियों की कमी का मामला उठा था। इसमें पुलिस की ओर से अपना पक्ष रखा था। इसमें बताया था कि पुलिस थानों में महीनों से गाड़ियां नहीं हैं। इस वजह से पुलिस को गश्त समेत नशा तस्करों को पकड़ने में दिक्कतें आ रही हैं। यही नहीं बिल पास होने में हो रही देरी के कारण टैक्सी की सुविधा भी नहीं ले पा रहे हैं। इसके बाद उपायुक्त शिमला ने नई गाड़ियों की खरीद के लिए प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है। शिमला जिले में 22 पुलिस स्टेशन और 34 पुलिस चौकियां हैं। हैरानी इस बात की है कि पुलिस चौकियों में वाहन की सुविधा का प्रावधान ही नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण पुलिस के लिए क्षेत्र में गश्त समेत आपराधिक घटना होने पर घटनास्थल पर पहुंचने में भी दिक्कतें पेश आती हैं।