उधर, चाइल्ड लाइन की काउंसलर विनीता ठाकुर ने बताया कि दादी को लड़के और लड़की की उम्र के बारे में पता नहीं था। लड़के के माता और पिता के बीमार रहने की सूरत में ही इस विवाह को रचाया गया। वहीं, लड़की पक्ष के लोगों को भी बाल कानून के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
लिहाजा, चाइल्ड लाइन ने शादी के बंधन में बंधे लड़का और लड़की के परिवार वालों को बाल विवाह कानून की जानकारी दी। विनीता ठाकुर ने दोनों परिवारों की काउंसलिंग कर बाल विवाह संबंधी कानून समझाए।
इसके बाद लड़की को उसके माता पिता के हवाले कर दिया। इस मौके पर चाइल्ड लाइन के सदस्य राजेंद्र सिंह और स्थानीय पंचायत की वार्ड सदस्य के अलावा अन्य भी कई लोग उपस्थित थे।
चाइल्ड लाइन की काउंसलर विनीता ठाकुर ने कहा कि लड़की के बालिग होने तक उसे पिता के घर भेजा गया है। बाद में उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर उसकी काउंसलिंग की जाएगी। बालिग हो जाने पर लड़की अपनी इच्छानुसार जहां चाहे रह सकती है।