इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है, विभाग की ओर से 300 के करीब सड़कों के टेंडर किए गए। लेकिन तकनीकी मूल्यांकन के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कुछ ठेकेदारों ने अपने पुराने और लंबित कार्य पूरे नहीं किए थे, बावजूद उन्होंने नए टेंडरों के लिए आवेदन कर दिया। नियमों के तहत लंबित परियोजनाओं वाले ठेकेदारों को नई परियोजनाओं के लिए पात्र नहीं माना जाता। इसके अलावा कई आवेदनों में जरूरी प्रमाण पत्र, वित्तीय दस्तावेज और अन्य औपचारिक कागजात अधूरे पाए गए।
कुछ मामलों में तकनीकी पात्रता से संबंधित कमियां भी सामने आईं, जिसके चलते विभाग ने संबंधित टेंडरों को रद्द कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। 49 सड़कों के टेंडर रद्द होने से अब इन परियोजनाओं के लिए दोबारा निविदाएं आमंत्रित करनी होंगी। नई टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी जांच और स्वीकृतियों में समय लगने के कारण सड़क निर्माण कार्य शुरू होने में अतिरिक्त समय लगेगा। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ठेकेदारों को टेंडर लेने के लिए सभी विभागीय औपचारिकताएं पूरी करनी होगी ताकि योजना के तहत स्वीकृत सड़कों का लाभ ग्रामीण आबादी को जल्द मिल सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर समझौता नहीं होगा।