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पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन: पीएम मोदी ने दिया वन नेशन, वन लेजिस्लेशन का मंत्र

Wed, 17 Nov 2021 09:02 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

ऐतिहासिक कौंसिल चैंबर भवन शिमला में लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुए पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली से ‘एक राष्ट्र, एक विधायी मंच’ का विचार प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने वन नेशन, वन लेजिस्लेटिव प्लेटफार्म का मंत्र देते हुए कहा कि एक ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म या पोर्टल बनाया जाए जो संसदीय व्यवस्था को तकनीकी बूस्ट दे और देश की सभी लोकतांत्रिक इकाइयों को भी जोड़ने का काम करे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिमला में हो रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में ‘वन नेशन, वन लेजिस्लेशन’ का मंत्र दिया है। उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा में मर्यादा, गंभीरता का पालन हो, कोई किसी पर राजनीतिक छींटाकशी न करें, ऐसा सबसे स्वस्थ दिन और स्वस्थ समय भी तय हो। पीएम मोदी ने बुधवार को शिमला में 82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित किया। यह भी बहुत सुखद है कि सम्मेलन की इस परंपरा को 100 साल हो रहे हैं। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति और 27 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष भी उपस्थित थे। 

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ऐतिहासिक कौंसिल चैंबर भवन शिमला में लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली से ‘एक राष्ट्र, एक विधायी मंच’ का विचार प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने वन नेशन, वन लेजिस्लेटिव प्लेटफार्म का मंत्र देते हुए कहा कि एक ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म या पोर्टल बनाया जाए जो संसदीय व्यवस्था को तकनीकी बूस्ट दे और देश की सभी लोकतांत्रिक इकाइयों को भी जोड़ने का काम करे। सदनों के लिए सारे संसाधन इस पोर्टल पर उपलब्ध हों।

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सेंट्रल और स्टेट लेजिस्लेशन पेपरलेस मोड में काम करें। उन्होंने कहा कि एक ऐसा पोर्टल हो, जो न केवल संसदीय व्यवस्था को जरूरी तकनीकी गति दे, बल्कि देश की सभी लोकतांत्रिक इकाइयों को जोड़ने का भी काम करे। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि अगले 25 वर्ष भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आग्रह किया कि वे एक ही मंत्र को जीवन में उतारें, वह ‘कर्तव्य, कर्तव्य, कर्तव्य’ है। 

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है, यह भारत का स्वभाव और सहज प्रकृति है। आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों में जाना है। यह संकल्प ‘सबके प्रयास’ से पूरे होंगे। चाहे पूर्वोत्तर की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान हो, दशकों से अटकी विकास परियोजनाओं को पूरा करना हो। ऐसे कितने ही काम हैं, जो देश ने बीते सालों में किए हैं।



प्रधानमंत्री ने दृढ़तापूर्वक कहा कि सदन की परंपराएं और व्यवस्थाएं स्वभाव से भारतीय हों। मोदी बोले - हमारी नीतियां और हमारे कानून भारतीयता के भाव को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाले हों। सबसे महत्वपूर्ण सदन में खुद का आचार-व्यवहार भी भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो, यह सबकी जिम्मेदारी हो। 

प्रधानमंत्री ने प्रस्ताव किया कि क्या साल में तीन-चार दिन सदन में ऐसे रखे जा सकते हैं, जिसमें समाज के लिए कुछ विशेष कर रहे जनप्रतिनिधि अपना अनुभव बताएं। अपने सामाजिक जीवन पक्ष के बारे में देश को बताएं। प्रधानमंत्री ने यह प्रस्ताव भी रखा कि बेहतर चर्चा के लिए अलग से समय निर्धारित कर क्या किया जा सकता है। ऐसी चर्चा की जानी चाहिए जिसमें मर्यादा का, गंभीरता का पूरी तरह से पालन हो, कोई किसी पर राजनीतिक छींटाकशी न करे। उन्होंने कहा कि एक तरह से वह सदन का सबसे ‘स्वस्थ समय’ हो, ‘स्वस्थ दिवस’ हो।   

नए सदस्यों को ट्रेनिंग देने का सुझाव
मोदी ने कहा कि नए सदस्यों को सदन से जुड़ी व्यवस्थित ट्रेनिंग दी जाए। उनको सदन की गरिमा और मर्यादा के बारे में बताया जाए। सभी दलों को साथ लेकर सतत संवाद बनाने पर बल देना होगा। राजनीति के नए मापदंड भी बनाने होंगे। इसमें पीठासीन अधिकारियों की भूमिका बहुत अहम है।

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सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए सभी दलों से चर्चा की जरूरत : बिरला 
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि बदलते परिप्रेक्ष्य में संसदीय समितियों के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाए जाने की जरूरत है, जिससे संसदीय दायित्वों का निर्वहन कर सकें। विधान मंडलों की बैठकों की संख्या और कानून निर्माण की चर्चा की कमी चिंता का विषय है। इसीलिए विधानमंडलों की नियत प्रक्रिया की समीक्षा करने की जरूरत है। ओम बिरला ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा भवन कौंसिल चैंबर में पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इससे सभी विधायी संस्थाओं को नियत प्रक्रिया में एकरूपता लाने की आवश्यकता है।

लोकतंत्र को सशक्त, जवाबदेह और पारदर्शी बनाते हुए जनता को बेहतर परिणाम दे पाएंगे। इस बारे में सभी दलों से चर्चा करने की जरूरत है। आशा है कि सभी दल इसमें सकारात्मक सहयोग देंगे। विधायकों के पीठासीन अधिकारियों के रूप में दायित्व है कि एक समर्थ, सक्षम, सशक्त विधायिका के निर्माण का संकल्प लें। इससे इक्कीसवीं सदी में नई चुनौतियों का सामना किया जा सके। इस सम्मेलन में निश्चित परिणाम निकलेगा। 


इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबको बदल देगी : हरिवंश
राज्य सभा के  उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि 12वीं सदी की दुनिया में भारत की संसदीय या विधायी प्रणाली की तैयारी क्या समय के अनुरूप है। उन्होंने जाने-माने फ्यूचरिस्ट रे कुर्जविल के एक उद्धरण को सामने लाते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 2021 से 2030 के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबको बदल देगी। इन परिस्थितियों में हमें ऐसे लेजिस्लेजर की जरूरत है, जो अपनी संस्थाओं को भविष्य के अनुरूप बना सकें। 

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा हिमाचल प्रदेश विधानसभा भवन कौंसिल चैंबर में पीठासीन अध्यक्षों के सम्मेलन के आरंभ होने के समय कहा कि विदेशों में इस संबंध में काम चल रहा है। नए कानून बनाने की जरूरत है। आवश्यक कानून बनाने में विलंब की समाज बड़ी कीमत चुकाता है। अनावश्यक कानूनों को खत्म करने की भी जरूरत है।

रामानुजम कमेटी ने अनावश्यक कानूनों की पहचान की। 2014 से 2019 के बीच 1500 ऐसे कानूनों को खत्म करने की दिशा में काम शुरू किया। राज्यों में इसे तेजी से करना बाकी है। गैर जरूरी कानूनों को खत्म करने का काम ज्यादा आगे नहीं बढ़ा है। कर्नाटक ने 1300 और उत्तर प्रदेश ने 500 कानून निरस्त किए हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और बंगाल ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं। बाकी राज्यों में ऐसा होना अभी बाकी है।

धर्मशाला में राष्ट्रीय विधान अकादमी बनाई जाए: जयराम 
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि धर्मशाला में राष्ट्रीय विधान अकादमी बनाई जाए। यहां चार-पांच दिन का विंटर सेशन होता है। इसका पूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए। यहां अगर राष्ट्रीय अकादमी स्वीकृत होता है तो इसका लाभ मिलेगा। सीएम जयराम ठाकुर ने बुधवार को पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन से पहले कहा कि हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार, रामलाल ठाकुर, वीरभद्र सिंह, शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल की ओर से दिए गए योगदान का वह स्मरण करते हैं। हिमाचल प्रदेश पहली कागजरहित विधानसभा रही है।

इस सदन ने कई अधिनियमों और नीतियों का निर्माण किया, जिससे प्रदेश के लोगों का चहुंमुखी विकास किया है। हिमाचल प्रदेश के गठन के समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। राज्य में विकास बड़ी चुनौती रहा है। जयराम ठाकुर ने कहा कि यह संयोग है कि इस वर्ष जहां पीठासीन अधिकारियों का शताब्दी समारोह कर रहे हैं। पचास वर्ष पूरा करके आगे बढ़ रहे हैं। बहुत से कार्यक्रम आने वाले समय में करने हैं। कोविड वैक्सीन की पहली डोज का लक्ष्य पूरा किया। वह प्रधानमंत्री का वर्चुअल माध्यम से जुड़ने के लिए भी धन्यवाद किया। 

विधानसभाओं में जवाब बाद में आते हैं, जबकि आरटीआई की सूचनाएं पहले : अग्निहोत्री
विधानसभा अध्यक्षों के सम्मेलन से पहले नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि वर्तमान में विधानसभाओं में जवाब बाद में आते हैं, जबकि आरटीआई की सूचनाएं पहले आती हैं। उन्होंने कहा कि दल-बदल कानून बन तो गए हैं, मगर भारतीय लोकतंत्र इससे कटघरे में खड़ा हो गया है। सदन में शून्यकाल हो या न हो, ये मामले भी लंबित हैं।

ये विचारणीय विषय हैं। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारियों की कोई पार्टी नहीं होती है। सदन का सारा दारोमदार इन्हीं पर रहता है। एक वक्त था जब पीठासीन अधिकारी पार्टी की बैठकों में नहीं जाते थे। मुकेश अग्निहोत्री ने इस सम्मेलन से पहले समय निकालने को पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और अन्य पीठासीन अधिकारियों का भी धन्यवाद किया।
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